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राजेंद्र सिंह राठौड़ः BJP के टिकट पर कभी नहीं हारे, इस बार कांग्रेस ने दी बड़ी चुनौती; जानें उनके पास कितनी संपत्ति

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर सभी की नजर लगी हुई है. साथ ही कई नेताओं की वजह से उनकी सीट भी चर्चा में आ गई है. राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ इस बार चूरू सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें चूरू जिले की ही तारानगर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है. कांग्रेस ने उनके सामने दिग्गज नेता और 6 बार सांसद रहे नरेंद्र बुढ़ानियां को मैदान में उतारा है. खास बात यह है कि बीजेपी के टिकट पर राठौड़ को कभी भी हार नहीं मिली है. 21 अप्रैल 1955 को जन्मे राजेंद्र सिंह राठौड़ प्रदेश की सियासत में बड़ा नाम हैं. छात्र राजनीति से अपना करियर शुरू करने वाले राजेंद्र सिंह राठौड़ ने एमए किया फिर एलएलबी की डिग्री हासिल की. वह 1979 में राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे. बाद में वह सक्रिय राजनीति में आ गए और पिछले 3 दशक से भी अधिक समय से वह राजस्थान में बीजेपी का अहम चेहरा बने हुए हैं. बीजेपी से पहले वह जनता दल के साथ जुड़े हुए थे. वह 7 बार विधायक रहे हैं.

BJP से जनता दल में थे राठौड़

राजेंद्र सिंह राठौड़ पहली बार 1990 में जनता दल के टिकट पर चूरू विधानसभा सीट से विधायक बने. हालांकि इससे पहले वह उन्हें 2 चुनावों में हार मिली थी. साल 1980 में वह जनता पार्टी के टिकट पर तारानगर सीट से चुनाव लड़े लेकिन वे हार गए और तीसरे नंबर पर रहे. साल 1985 में जनता पार्टी ने राठौड़ को फिर से टिकट दिया और वे दूसरे स्थान पर रहे. लगातार 2 नाकामी के बाद तीसरे प्रयास में वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे. इससे बाद वह बीजेपी में आ गए और 1993 के चुनाव में भगवा पार्टी के टिकट पर चूरू से ही चुने गए. 1998, 2003, 2008, 2013 और 2018 के चुनाव में भी जीत हासिल की. हालांकि पिछले 7 चुनावों में से वह 2008 के चुनाव में तारानगर विधानसभा सीट से विजयी हुए थे. शेष 6 बार वह चूरू से ही चुने गए थे. एक बार फिर वह तारानगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. वह वसुंधरा राजे सिंधिया के शासनकाल में मंत्री भी रहे हैं.

कितनी संपत्ति के मालिक हैं राठौड़

राठौड़ की पहचान एक प्रखर वक्ता की रूप में है. साल की शुरुआत में गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई. उनका विवादों से भी नाता रहा है. 2006 में जयपुर में शराब तस्कर दारा सिंह उर्फ दारिया की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी. पत्नी की शिकायत पर जांच शुरू हुई जिसमें राजेंद्र राठौड़ भी आरोपी बने. मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट की ओर से सीबीआई जांच के आदेश दिए गए. जिसमें राठौड़ समेत 17 लोगों को आरोपी बनाया गया. वह इस मामले में अप्रैल 2012 को गिरफ्तार कर लिए गए. वह 51 दिनों तक जेल में रहे. बाद में वह मामले से बरी हो गए. Mराजेंद्र राठौड़ की ओर से दाखिल चुनावी हलफनामे में जानकारी दी गई कि उनके पास 50 हजार रुपये कैश के रूप में है, उनकी पत्नी के पास भी इतनी है कैश है. हलफनामे के अनुसार, राजेंद्र राठौड़ के पास 4.71 करोड़ रुपये के रूप में चल संपत्ति है तो पत्नी के पास 3.28 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है. साथ ही 4.10 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति राजेंद्र राठौड़ के पास है जबकि उनकी पत्नी के पास 23.23 करोड़ की अचल संपत्ति है.

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