अजमेर। रिपोर्ट टाइम्स।
राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर विवाद गहराता जा रहा है। अजमेर शरीफ दरगाह में इन दिनों उर्स चल रहा है, जिसमें हर साल की तरह पीएम मोदी की ओर से भी चादर पेश की जाएगी। मगर हिंदू सेना ने पीएम से ऐसा ना करने की अपील की है, जिसके बाद यह विवाद फिर सुर्खियों में है। अब इस मामले में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का भी बयान आया है।
अजमेर में पीएम मोदी की चादर पर विवाद
राजस्थान की अजमेर शरीफ दरगाह फिर विवादों में है। पहले दरगाह में मंदिर का दावा किए जाने के बाद विवाद गहराया था। जो अब अदालत पहुंच गया है, इस बीच अब अजमेर दरगाह में पेश की जाने वाली चादर को लेकर विवाद शुरू हो गया है। उर्स के दौरान पीएम मोदी की ओर से चादर पेश किए जाने का हिंदू सेना ने विरोध जताया है। हिंदू सेना का कहना है कि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में पीएम मोदी को यहां चादर नहीं भेजनी चाहिए।
क्या बोले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री?
इस मामले में अब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का भी बयान आया है। जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला का कहना है कि ख्वाजा गरीब नवाज से कई समुदायों की भावना जुड़ी हुई हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी दवाब के आगे नहीं झुकेंगे और अजमेर दरगाह में चादर भेजने की परंपरा जारी रखेंगे। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि अजमेर दरगाह में सिर्फ एक धर्म के लोग नहीं जाते। ख्वाजा गरीब नवाज से कई समुदायों की भावना जुडी हैं।
अजमेर शरीफ दरगाह में शुरु हुआ उर्स
अजमेर शरीफ दरगाह में इन दिनों 813 वां उर्स चल रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी की ओर से भी 4 जनवरी को चादर भिजवाई जाएगी, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू पीएम की ओर से अजमेर दरगाह में चादर लेकर आएंगे। इससे पहले बुधवार रात चांद दिखने पर तोप के गोले दाग कर उर्स का ऐलान किया गया। इसके बाद सभी जायरीनों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी। दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान की सदारत में पहली महफिल की गई।
