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रूस पर अमेरिका की पाबंदी ने कैसे बढ़ाया भारत का दर्द?

रिपोर्ट टाइम्स।

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ में अपनी स्पीच की शुरुआत DRILL BABY DRILL से शुरू की थी. अब इस ड्रिल बेबी ड्रिल के गेम का असर दिखना शुरू हो गया है. रूस के तेल क्षेत्र पर लगाए गए व्यापक अमेरिकी प्रतिबंधों ने भारत में कच्चे तेल के प्रवाह को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. सार्वजनिक क्षेत्र की भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कहा है कि मार्च की आपूर्ति के लिए पर्याप्त कार्गो उपलब्ध नहीं है.

अमेरिका के फैसले का असर

दरअसल, अमेरिका ने 10 जनवरी को रूसी ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाते हुए व्यापक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. इनमें रूसी तेल उत्पादकों गैजप्रोम नेफ्ट और सर्गुटनेफ्टगास पर प्रतिबंध, रूसी ऊर्जा निर्यात में शामिल 183 जहाजों को काली सूची में डालना और दर्जनों तेल व्यापारियों, तेल क्षेत्र सेवा प्रदाताओं, टैंकर मालिकों एवं प्रबंधकों, बीमा कंपनियों और ऊर्जा अधिकारियों पर प्रतिबंध शामिल हैं.

इन प्रतिबंधों की घोषणा ऐसे समय में की गई जब भारत की तेल रिफाइनिंग कंपनियां मार्च के कार्गो के लिए बातचीत शुरू कर रही थीं. बीपीसीएल के निदेशक (वित्त) वी रामकृष्ण गुप्ता ने बृहस्पतिवार को विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि पिछले दो महीनों में जनवरी और फरवरी के लिए रूसी तेल की बुकिंग की गई थी लेकिन मार्च की आपूर्ति के लिए पर्याप्त कार्गो नहीं मिल पा रहा है.

क्या है आगे का प्लान?

उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की आपूर्ति में रूसी तेल की हिस्सेदारी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के 31 प्रतिशत से घटकर मार्च तिमाही में 20 प्रतिशत तक गिरने का अनुमान है. चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में अप्रैल 2024 में बीपीसीएल के द्वारा पंसंस्कृत किए गए कुल तेल में रूसी तेल की हिस्सेदारी 34-35 प्रतिशत थी.

रूस से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच गुप्ता ने कहा कि बाजार में पर्याप्त तेल उपलब्ध है और कंपनी इस नुकसान की भरपाई के लिए पश्चिम एशियाई देशों का रुख कर सकती है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका एवं अन्य पश्चिमी देशों ने रूसी तेल आयात पर कई तरह की बंदिशें लगा दी थीं. ऐसे में सस्ते दाम पर उपलब्ध रूसी तेल को भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करना शुरू कर दिया था. कुछ वर्षों में ही देश की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत हो गई.

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