जयपुर। रिपोर्ट टाइम्स।
1 फरवरी को प्रस्तुत होने वाला बजट न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। सरकार ने इस बार रोजगार सृजन, महंगाई में कमी और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का जो रोडमैप तैयार किया है, वह जनता की उम्मीदों को लेकर कई सवाल भी खड़ा कर रहा है। विपक्ष की नजरें इस पर टिकी हैं, क्योंकि अगर बजट में बड़े बदलाव हुए, तो वह चुनावी राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं। इस बार की चुनौतियां केवल सरकारी फैसलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ने वाला है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की संभावना
पिछले साल सरकार ने पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय को 1.19 ट्रिलियन रुपये का बजट जारी किया था, लेकिन पेट्रोलियम सब्सिडी में कटौती की गई थी। इस बार, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग की है। अगर सरकार इसे स्वीकार करती है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट हो सकती है। इसके अलावा, अगर सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाती है, तो देशभर में इनकी कीमतें समान हो सकती हैं, जिससे जनता को राहत मिल सकती है।
मोबाइल चार्जर की कीमतों में कमी
मोबाइल और चार्जर की कीमतों पर भी बजट का प्रभाव हो सकता है। पिछले बजट में कस्टम ड्यूटी में कटौती की गई थी, जिससे इन उत्पादों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। इस बार भी अगर सरकार कस्टम ड्यूटी या टैक्स कम करती है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस की कीमतों में और कमी देखने को मिल सकती है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक राहत होगी।
विभिन्न क्षेत्रों में संभावित घोषणाएं
पिछले बजट में सरकार ने सस्टेनेबिलिटी और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया था, और इस बार भी रेलवे, हेल्थकेयर, एविएशन, हॉस्पिटैलिटी, और डेटा सेंटर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुछ बड़े ऐलान होने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में निवेश और सुधार से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न हो सकते हैं।
