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कोचिंग सेंटर पर सरकार की सख्ती, बिल पर BJP के विधायक चिंतित

जयुपर। रिपोर्ट टाइम्स।

राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष और विपक्ष ने इसको लेकर सदन में अपनी-अपनी राय रखी. विधेयक को समीक्षा के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया है. उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि अब बिना सरकार के अनुमति के कोई भी कोचिंग नहीं चलेगी. उन्होंने बताया कि ध्वनि मत से विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव पास हुआ है.

वहीं बीजेपी विधायकों ने विधेयक को लेकर नाराजगी जाहिर की है. पार्टी के विधायक कालीचरण सराफ ने कहा अगर कानून ज़्यादा सख़्त करेंगे तो कोचिंग इंस्टिट्यूट दूसरे राज्यों में जाएंगे. वहीं एक दूसरे विधायक गोपाल शर्मा ने कहा सख्ती जरूरी है लेकिन बड़े मगरमच्छों का क्या होगा. उन्होंने कहा कि छोटी मछलियों पर निशाना साधने के साथ बड़े मगरमच्छों पर भी कार्रवाई होना जरूरी है.

‘राजस्थान शिक्षा और ज्ञान की भूमि रही’

राजस्थान कोचिंग सेंटर विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि कोचिंग सेंटर से विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त हो रही है, देश की जीडीपी के साथ में देश की अर्थव्यवस्था में हमारा योगदान बढ़ रहा है, असफल होने पर विद्यार्थी को घोर निराशा होती है. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है. डिप्टी सीएम ने कहा कि राजस्थान शिक्षा और ज्ञान की भूमि रही है.

‘सिर्फ लाभ के लिए न चले कोचिंग सेंटर’

उन्होंने कहा कि कोटा जिसे कभी शिक्षा के केंद्र के रूप में देखा जाता था आज कोचिंग उद्योग बनकर रह गया है. उन्होंने कहा कि आज हमें यह सुनिश्चित करना है की कोचिंग केवल व्यवसाय और लाभ के लिए ना चले बल्कि वो छात्रों को अपने संस्थानों में एक पारदर्शी में जरूरी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करें.

‘बिना सरकार की अनुमति के नहीं चलेगी कोचिंग’

बैरवा ने कहा कि इस बिल का मकसद कोचिंग संस्थानों को परेशान करने का नहीं है, बल्कि इस बिल से सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण किया जाएगा. कोई भी कोचिंग बिना सरकार की अनुमति के नहीं चलेगी. प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि बिल का उद्देश्य कोचिंग में पढ़ रहे हैं विद्यार्थियों को बेसिक सुविधा देने का है, उन्हें इको फ्रेंडली वातावरण मिले यह सुनिश्चित करना है.

कांग्रेस ने बिल को बताया कमजोर

वही कांग्रेस ने इस बिल को दिखावा बताया है. नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने कहा यह बिल कमजोर था, सरकार कोचिंग वालों से मिल गई है. उन्होंने कहा बिल मनमर्ज़ी फीस और सुसाइड रोकने का प्रावधान नहीं था, कोचिंग संस्थान पर लगाम नहीं लगाने के लिए बिल में कुछ भी नहीं है.

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