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कौन हैं वो महिला जज जिनके एक फैसले से तहव्वुर राणा के भारत आने का रास्ता खुला

रिपोर्ट टाइम्स।

चंद घंटो के बाद मुंबई आतंकी हमलों के गुनहगारों में से एक तहव्वुर राणा भारत में होगा.राणा को भारत की न्यायिक एजेंसियों के सुपुर्द अमेरिका ने कर दिया. जिसके बाद भारतीय अधिकारियों की एक टीम उसे यूएस से लेकर दिल्ली के लिए निकल गई. उसे भारत में ट्रायल का सामना करना होगा. उसके प्रत्यर्पण को मोदी सरकारी की कूटनीति की बड़ी जीत कहा जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह ने भी सरकार की पीठ थपथपाई है. मीडिया रपटों में कहा जा रहा है कि राणा को तिहाड़ जेल की न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है.

मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमलों में गिरफ्तारी के करीब 16 साल बाद राणा के भारत आने का रास्ता साफ हुआ है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए के तीन अधिकारी, खुफिया विभाग के तीन अधिकारियों के साथ राणा को लेने के लिए अमेरिका गए हुए हैं. राणा की भारत वापसी के इस अहम पड़ाव पर आइये जानें उस जज के बारे में जिनके एक फैसले से राणा की आखिरी उम्मीद समाप्त हो गई. इस जज का नाम एलेना कगन है.

कौन हैं यूएस की जज एलेना कगन

दरअसल, इसी साल फरवरी महीने की 27 तारीख को तहव्वुर राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज एलेना कगन के सामने प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका लगाई थी. जिसे उन्होंने 6 मार्च को खारिज कर दिया. इसी के बाद राणा के भारत आने का रास्ता खुला. 64 साल की कगन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जज हैं. साल 2010 में बराक ओबामा ने कगन की नियुक्ति की थी. वो अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की चौथी महिला जज हैं. अमेरिकी की पहली महिला सॉलिसिटर जनरल बनने का मकाम भी इन्हें ही हासिल है. साल 2009 में वो यूएस की सॉलिसिटर जनरल बनी थीं. अगले बरस सुप्रीम कोर्ट के जज जॉन पॉल स्टीवेन्स के रिटायरमेंट के बाद उनकी जगह ओबामा ने कगन का नाम आगे बढ़ाया. अमेरिकी सीनेट ने उनकी नियुक्ति 63-37 के बहुमत से किया था.

तहव्वुर राणा की कोर्ट से ये थी गुहार

एलेना कगन ने जब राणा की याचिका खारिज की तो उसने अमेरिकी चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के सामने भी गुहार लगाई थी. इस याचिका को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों – जस्टिस क्लेरिंस थॉमस, जस्टिस सैमुएल एलिटो, जस्टिस सोनिया सोटोमायोर, जस्टिस एलेना कगन, जस्टिस नील एम. गोरसुच, जस्टिस ब्रेट एम. कवाना, जस्टिस एमी कोन बैरेट, जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन के सामने रखा गया. पर यहां भी राणा की बात नहीं बनी. राणा ने अमेरिकी सर्वोच्च अदालत में जो दलीलें रखीं, उनमें ये था कि उसे मुसलमान, पाकिस्तानी और इस्लामाबाद की आर्मी का हिस्सा होने के कारण भारत में ज्यादा ज्यादती का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही, उसने अपनी बिगड़ती सेहत का भी हवाला दिया था. मगर अदालत में उसकी एक न चली.

राणा के खिलाफ नरेन्दर मान लड़ेंगे केस

तहव्वुर राणा की भारत वापसी से पहले देश में हाई अलर्ट है. खासकर, दिल्ली में अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ाई गई है. गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बीच तैयारियों को लेकर कल एक बैठक भी हुई. इस बैठक में इंटेलिजेंस ब्यूरो के डीजी – डायरेक्टर जनरल तपन डेका, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और एनआईए के डायरेक्टर सदानंद वसंत दाते मौजूद रहें. देर रात, गृह मंत्रालय ने एक गैजेटेड नोटिफिकेशन जारी कर राणा के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का पब्लिक प्रॉसिक्यूटर वकील नरेन्दर मान को नियुक्त किया. मान की नियुक्ति नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख से 3 साल की अवधि के लिए या इस मामले का मुकदमा पूरा होने तक, जो भी पहले हो, के लिए की गई है.

पाकिस्तानी, कनाडाई नागरिक, डॉक्टर

राणा ने अमेरिकी कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के क्रूरता के खिलाफ बने सिद्धांतों का हवाला देते हुए प्रत्यर्पण का विरोध किया था. लेकिन उसकी दलीलें अदालत ने नहीं मानी. भारत को जब सरेंडर वारंट मिल गया तो फिर अधिकारियों की एक टीम भगोड़े अपराधी को विदेशी जमीन से लाने के लिए गई. राणा के भारत आने के बाद सबसे पहले उसकी मेडिकल जांत हो सकती है. साथी ही, उसे वीडियो लिंक के जरिये अदालत के सामने पेश किया जा सकता है. राणा मूल रूप से पाकिस्तान का रहने वाला है. पर लंबे अरसे से वो कनाडाई नागरिक है. फिलहाल, वो अमेरिकी शहर लॉस एंजलस के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद था. लश्कर-ए-तैयबा के डेविड कोलमैन हेडली – जिसे 26/11 हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है, राणा उसका करीबी सहयोगी रहा है.

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