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जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई बने भारत के 52वें CJI, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

REPORT TIMES: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार सुबह जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई. यह कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ काविंद और कई अन्य केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों सहित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए. सभी की मौजूदगी में जस्टिस गवई ने हिंदी में शपथ ली. उनका कार्यकाल 6 महीने से अधिक समय का होगा और वह 23 नवंबर तक पद पर रहेंगे.  जस्टिस गवई ने पूर्व CJI संजीव खन्ना की जगह ली है जो 65 वर्ष की आयु होने पर मंगलवार को रिटायर हुए हैं.

शपथ ग्रहण में आईं ये हस्तियां

शपथ ग्रहण समारोह में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मौजूदा जस्टिस, रिटायर्ड चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों सहित प्रतिष्ठित कानूनी और राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति देखी गईं. इस कार्यक्रम में कई प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हुईं. जस्टिस गवई अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आने वाले भारत के दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं. उनसे पहले जस्टिस के.जी. बालकृष्णन साल 2007 से 2010 के बीच सीजेआई रहे थे.

अमरावती में हुआ था जन्म

जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को अमरावती में हुआ था. उन्होंने 16 मार्च 1985 को बार में दाखिला लिया और शुरुआत में 1987 तक दिवंगत राजा एस. भोंसले, पूर्व महाधिवक्ता और हाई कोर्ट जस्टिस के अधीन काम किया. इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में अपना कानूनी करियर शुरू करने से पहले 1987 से 1990 तक उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की उनकी विशेषज्ञता संवैधानिक और प्रशासनिक कानून तक फैली हुई है. पिछले कुछ वर्षों में, उन्होंने नागपुर और अमरावती नगर निगमों और अमरावती विश्वविद्यालय सहित कई नगर निगमों और संस्थानों के लिए स्थायी वकील के रूप में काम किया है. इसके अलावा, उन्होंने नियमित रूप से SICOM और DCVL जैसे स्वायत्त निकायों और निगमों का प्रतिनिधित्व किया है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को चेतावनी दी कि वे आत्मसमर्पण कर दें नहीं तो लड़ाई का परिणाम तय है और दो वर्ष में नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा. शाह नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे. सुरक्षाबलों ने 16 अप्रैल को कांकेर जिले में एक मुठभेड़ के दौरान 29 नक्सलियों को मार गिराया था, जिसमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं. शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, पिछले 10 वर्षों के दौरान नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को समाप्त किया। मोदी जी ने इस देश से नक्सलवाद को समाप्ति के कगार पर ला दिया. उन्होंने कहा, पांच वर्ष तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में नक्सलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री और विजय शर्मा के गृह मंत्री बननेके बाद पिछले चार माह में सुरक्षाबलों ने 90 से ज्यादा नक्सलवादियों को मार गिराया. इसके साथ ही 123 नकस्लियों को गिरफ्तार किया गया और 250 ने आत्मसमर्पण कर दिया. देश भर से नक्सलवाद को समाप्त किया अमित शाह ने कहा, मोदी जी ने देश भर से नक्सलवाद को समाप्त किया चाहे वह आंध्रप्रदेश हो, तेलंगाना हो, बिहार बिहार हो, झारखंड हो या मध्य प्रदेश हो. मैं कहकर जाता हूं कि मोदी जी को फिर से प्रधानमंत्री बना दीजिए और दो साल दे दीजिए. छत्तीसगढ़ से हम नक्सलवाद को उखाड़ फेंकेंगे. गृह मंत्री ने कहा, जब तक नक्सलवाद है तब तक आदिवासी भाई बहनों के लिए बिजली, स्कूल, राशन की दुकान देने में परेशानी हो रही है. जो भी नक्सली बचे हैं उनको कहता हूं कि सरेंडर हो जाओ, आपको फिर से प्रतिस्थापित करेंगे नहीं तो लड़ाई का परिणाम तय है. नक्सलवाद को हम समाप्त कर देंगे. नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए समझाएं शाह ने सभा में मौजूद जनता से अनुरोध किया कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए समझाएं. उन्होंने कहा, मैं आदिवासी भाइयों और बहनों से कह रहा हूं कि जब तक नक्सलवाद है आदिवासी क्षेत्र में शांति नहीं हो सकती, रोड नहीं बन सकता, बिजली नहीं पहुंच सकती, गैस कनेक्शन नहीं आ सकता, शिक्षा नहीं पहुंच सकती, नौकरी नहीं पहुंच सकती और इलाज नहीं पहुंच सकता है. शाह ने कहा कि आप सभी लोग उनको समझाइए सरेंडर कर जाएं, ना करें तो आप चिंता मत करना, हम दो ही साल में छत्तीसगढ़ की भूमि से नक्सलवाद को उखाड़ कर फेंक देंगे और यहां विकास की गंगा प्रवाहित करेंगे. Read Also : अमित शाह ने कटिहार से भरी हुंकार, कांग्रेस और राजद पर बोला हमला, जानिए लालू-तेजस्वी के लिए क्या कहा.. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 2037 में विकसित भारत की कल्पना रखी है. विकसित भारत का सबसे बड़ा फायदा आदिवासी, दलित, किसान, युवा, गरीब और महिलाओं को होने वाला है। विकसित भारत की कल्पना आप सभी के कल्याण के लिए है. शाह ने कहा कि कांग्रेस कहती है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है लेकिन हम (भाजपा) कहते हैं कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों का है.

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