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‘भामाशाह सेंटर राजे सरकार की बड़ी उपलब्धि थी’ क्यों गहलोत ने वसुंधरा की तारीफ में कसीदे पढ़े

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राजस्थान में विधानसभा चुनावों में अब महज एक साल से भी कम समय बचा है ऐसे में इस दौरान नेताओं की ओर से की गई बयानबाजी कई मायनों में अहम हो जाती है. राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का हाल में एक बयान आया जिसमें उन्होंने अपनी राजनीति विरोधी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की जमकर तारीफ की. गहलोत ने पूर्व सीएम राजे के कार्यकाल में बने भामाशाह सेंटर की तारीफों की झड़ी बांध दी. जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि भामाशाह सेंटर वसुंधरा राजे के कार्यकाल में बना था जो कि एक बड़ी उपलब्धि थी और मैं इसकी तारीफ करता हूं. वहीं सीएम ने कहा कि इसके साथ ही मेरी उनसे एक शिकायत भी है जहां सेंटर के ठीक सामने राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर का मैंने शिलान्यास किया था जिसका काम सरकार बदलते ही बंद हो गया. गहलोत ने एक बार फिर दोहराया कि जिस तरह से सरकार बदलते ही वसुंधरा राजे ने रिफायनरी से लेकर कई योजनाएं बंद कर दी उसी तरह से सेंटर का काम भी बंद कर दिया गया.

अच्छे काम की हो तारीफ : गहलोत

गहलोत ने आगे कहा कि किसी भी सरकार के अच्छे काम की हमेशा तारीफ की जानी चाहिए. उन्होंने बताया कि विपक्ष का मतलब यह नहीं होता है कि वह हर काम की आलोचना करता रहे मेरा मानना है है कि सरकार चाहे किसी भी दल की हो लेकिन जो अच्छा काम किया है उसकी तारीफ की जानी चाहिए.

गहलोत के मुताबिक मुझे विपक्ष से शिकायत है कि एसीबी राज्य में लगातार भ्रष्ट अफसरों पर छापे मारकर काली कमाई उजागर कर रही है और फिर भी विपक्ष कहता है कि राज्य में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. गहलोत ने कहा कि हमनें पूरे प्रदेश में थानों में एफआईआर दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया जिसके कारण से केस बढ़ गए लेकिन अपराधियों के खिलाफ हम जीरो टोलरेंस पर काम कर रहे हैं.

अदावत का रहा है इतिहास

गौरतलब है कि राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे और सीएम गहलोत एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते रहे हैं. हालांकि सियासी गलियारों में दोनों के बीच कभी-कभी साठ-गांठ की भी चर्चा होती रहती है. इसके अलावा समय-समय पर दोनों नेता एक दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूकते हैं. अब ताजा बयान में सीएम का राजे सरकार की तारीफ करने के कई मायने निकाले जा रहे हैं. मालूम हो कि गहलोत के 2018 में सीएम बनते ही वसुंधरा राजे के सरकारी बंगले को लेकर खूब हंगामा हुआ था और उस दौरान वसुंधरा राजे का बंगला खाली करवाने का मामला कोर्ट में चला गया जहां से गहलोत सरकार ने बीच का रास्ता निकाला था.

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