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ब्राह्मणों को संदेश…मेवाड़ साधने का प्लान, जोशी को कमान सौंपने के पीछे ये है सियासी गणित

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जयपुर: राजस्थान में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट तेज होने के साथ ही पार्टियों में आलाकमान के फैसले आने लगे हैं. ताजा मामला बीजेपी खेमे से जुड़ा है जहां राजस्थान बीजेपी की कमान नए चेहरे के हाथ में दी गई है. विधानसभा चुनाव से महज 8 महीने पहले राजस्थान बीजेपी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए सतीश पूनिया की जगह चित्तौड़गढ़ से लोकसभा सांसद सीपी जोशी को बीजेपी का नया प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया है. पूनिया का तीन साल का कार्यकाल नवंबर 2022 में पूरा हो गया था. वहीं एबीवीपी से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले जोशी संघ के करीबी लोगों में गिने जाते हैं. दरअसल राजस्थान में बीजेपी खेमे में सीएम फेस की लड़ाई जगजाहिर है ऐसे में संगठन में हुए इस बड़े बदलाव के बाद कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही है.वहीं जोशी को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने मेवाड़ को साधने की भी कोशिश की है जहां ब्राह्मण और वैश्य एक बड़ा वोट बैंक है. मालूम हो कि बीते दिनों मेवाड़ से ही बीजेपी ने गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाया था. वहीं पूनिया के जाने के बाद अब विधानसभा में खाली चल रहे नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति भी जल्द हो सकती है. माना जा रहा है कि अब नेता प्रतिपक्ष के पद पर किसी गैर ब्राह्मण चेहरे को लाया जा सकता है. वहीं पूनिया को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिलने की भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.

कार्यकर्ता के रूप में जीवन पर्यन्त करूंगा काम : पूनिया

वहीं सतीश पूनिया ने राजस्थान के नव मनोनीत प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को बधाई देते हुए कहा कि हम सब कृतसंकल्प हैं कि मिलकर 2023 में राजस्थान को कांग्रेस मुक्त बनाकर बीजेपी की बहुमत की सरकार बनाएंगे. पूनिया ने कहा कि एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के निर्देशानुसार जीवन पर्यन्त काम करता रहूंगा. उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का आभारी हूँ कि मेरे जैसे साधारण किसान के घर में जन्मे कार्यकर्ता को तीन सालों तक ज़िम्मेदारी देकर सम्मान दिया और इन तीन सालों में संगठनात्मक रचना और आंदोलन के द्वारा पार्टी को पूरी ताकत से धरातल पर सक्रिय करने में योगदान दे पाया. वहीं बीजेपी के प्रभारी अरूण सिंह ने कहा कि सतीश पूनिया ने राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी के संगठन को विस्तार और मज़बूत किया. इसके अलावा सफलता पूर्वक राजनैतिक कार्यक्रम कर गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ व्यापक जन आक्रोश तथा संघर्ष का प्रभावी नेतृत्व दिया और आगे भी उनकी अहम भूमिका रहेगी.

पूनिया रहे साढ़े तीन साल प्रदेशाध्यक्ष

बता दें कि सतीश पूनिया को 15 सितंबर 2019 को बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था जिसके बाद वह इस पद पर साढ़े तीन साल तक रहे. पिछली राजे सरकार में अशोक परनामी की जगह चुनावी साल में मदन लाल सैनी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था जिसके बाद सैनी के निधन के बाद सतीश पूनिया को प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. पूनिया ने बीते 3 सालों के कार्यकाल में राजस्थान के तमाम जिलों का दौरा कर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम किया. वहीं पूनिया के कार्यकाल में ही बीजेपी ने गहलोत सरकार के खिलाफ व्यापक जन आक्रोश रैली का आयोजन भी किया था.

BJP ने मेवाड़ साधने की बनाई रणनीति!

वहीं सीपी जोशी के प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने के बाद माना जा रहा है कि 2023 के चुनावों के लिए बीजेपी का मेवाड़ पर सीधा फोकस है. मालूम हो कि मेवाड़ में उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा जिले आते हैं जहां ब्राह्मण और वैश्य वर्ग का एक बड़ा वोट बैंक है. वहीं जोशी ब्राह्मण समाज से आते हैं.इससे पहले उदयपुर से आने वाले कद्दावर नेता गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाया गया था जिसके बाद मेवाड़ इलाके में बीजेपी के पास कोई बड़ा नाम नहीं था ऐसे में अब जोशी को पद देकर बीजेपी ने इस बेल्ट में एक बड़ा संदेश देने की भी कोशिश की है.

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