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Right to Health Bill वापस लेने की जिद पर अड़े डॉक्टर्स, सरकार ने दिया वार्ता का न्योता

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जयपुर: राजस्थान में गहलोत सरकार ने विधानसभा में राइट टू हेल्थ बिल पारित करवा दिया है लेकिन इस पर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. बीते मंगलवार को विधानसभा में जब बिल पास हुआ उसके बाद से भी लगातार डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर रखा है. वहीं मंत्री स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा की अपील का भी कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है. वहीं शनिवार को लगातार छठे दिन निजी अस्पतालों के बंद रहने से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई है. इस मामले में अब सीएम अशोक गहलोत ने सीधी दखल देते हुए जनता के हितों का ध्यान रखते हुए डॉक्टरों को हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत से समाधान निकाला जा सकता है. गहलोत ने शनिवार देर रात मुख्यमंत्री आवास पर एक अहम बैठक ली जहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री परसादी लाल मीणा सहित आला अधिकारी मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि शनिवार रात डॉक्टरों को वार्ता के लिए बुलाए जाने पर वह समय का हवाला देते हुए नहीं पहुंचे जिसके बाद रविवार को मुख्य सचिव से डॉक्टरों की बात हो सकती है. दरअसल डॉक्टर कानून को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. वहीं शनिवार को डॉक्टरों की हड़ताल की सीधा असर मरीजों पर देखा गया जहां अस्पतालों में इमरजेंसी में भी सीधे इलाज से इनकार किया जा रहा है. वहीं हताश मरीज सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भाग रहे हैं जिसके कारण सरकारी अस्पतालों में भार बढ़ गया है.

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मुख्य सचिव करेंगी डॉक्टरों से वार्ता

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जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने शनिवार को मुख्य सचिव उषा शर्मा को निर्देश देकर कहा है कि वह डॉक्टरों के साथ तुरंत बैठक कर इसका समाधान निकालें. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हमेशा ही डॉक्टरों के हितों का ख्याल रखा है और उनकी पे-ग्रेड और पे-स्केल जैसे फैसलों पर सरकार ने कभी देरी नहीं की है.

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गहलोत ने कहा कि राइट टू हेल्थ कानून सभी डॉक्टरों से बात करने के बाद ही लाया गया है और इसमें निजी अस्पतालों की जो आपत्तियां थी वो दूर करते हुए सभी मांगें मान ली गई हैं. वहीं इस बिल को पक्ष-विपक्ष ने विधानसभा में सर्वसम्मति से पास किया है. मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रखने का किसी को भी अधिकार नहीं है.

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कानून वापस लें सरकार : डॉक्टर्स

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निजी डॉक्टर्स की हड़ताल को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शरद कुमार अग्रवाल ने मीडिया से कहा कि कोरोना काल में डॉक्टरों की भूमिका को सराहा गया था लेकिन अब उन्हें छोड़ दिया गया है. उन्होंने बताया कि राइट टू हेल्थ बिल अव्यवहारिक है जिससे किसी का भी फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हर हाल में बिल वापस लेना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कारण जनता को नुकसान हो रहा है.

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भटक रहे हैं इधर-उधर मरीज

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निजी डॉक्टर्स की हड़ताल को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ शरद कुमार अग्रवाल ने मीडिया से कहा कि कोरोना काल में डॉक्टरों की भूमिका को सराहा गया था लेकिन अब उन्हें छोड़ दिया गया है. उन्होंने बताया कि राइट टू हेल्थ बिल अव्यवहारिक है जिससे किसी का भी फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हर हाल में बिल वापस लेना होगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कारण जनता को नुकसान हो रहा है.इधर राइट टू हेल्थ बिल के खिलाफ राजस्थान में सभी डॉक्टर्स संगठनों ने 27 मार्च को एक बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा मेडिकल बंद का भी आह्वान किया गया है. इसके अलावा सेवारत चिकित्सक संघ ने 29 मार्च को सामूहिक अवकाश पर जाने का भी ऐलान किया है.

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