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बीजेपी का 2024 में मिशन 400 प्लस, 66 सीटों पर खास फोकस, अल्पसंख्यकों को टिकट देने की तैयारी

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बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में एक नए सियासी समीकरण के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है. पीएम मोदी के मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ को बीजेपी सिर्फ नारे तक ही नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. इसी कड़ी में बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में एक दर्जन से ज्यादा अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट देने की तैयारी में है ताकि मुस्लिम बहुल सीटों पर कमल खिलाया जा सके. मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने के साथ ही बीजेपी मिशन-2024 में पूरे दमखम के साथ जुट गई है. बीजेपी ने 2024 के चुनाव में 400 प्लस सीटें जीतने का टारगेट तय किया है. पार्टी का यह लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है जब देश की 66 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर उसे जीत मिले. ऐसे में अल्पसंख्यक बहुल 66 सीटों से एक तिहाई सीटों पर जीतने के लक्ष्य के साथ बीजेपी ने अपनी तैयारी शुरू की है. इस फेहिरश्त में केरल की वायनाड सीट भी शामिल है, जहां से कांग्रेस नेता राहुल गांधी सांसद चुने गए थे.

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बीजेपी का 2024 में मिशन 400 प्लस का लक्ष्य

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बीजेपी रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी को अगर 400 से ज्यादा लोकसभा सीटें जीतना है तो देश के अल्पसंख्यक बहुलता वाली 66 सीटों पर विशेष ध्यान देना होगा. ये वो सीटें हैं, जहां पर मुस्लिम और ईसाई मतदाता 30 फीसदी से ज्यादा है. देश के 15 राज्यों की 66 अल्पसंख्यक बहुल सीटें पार्टी ने चिन्हित की हैं और उसके लिहाज से ही तैयारी कर रही है.हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन अल्पसंख्यक बहुल सीटों में से कई सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन उन पर जीत का मार्जिन बहुत कम था. ऐसे में बीजेपी अपने कब्जे वाली सीटों के साथ-साथ अन्य दूसरी सीटें पर जीत का परचम फहराना चाहती है. इसीलिए बीजेपी के मुस्लिम नेताओं को इन तमाम सीटों पर फोकस करने के लिए हाई कमान ने कह रखा है.

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यूपी से बिहार तक मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस

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बीजेपी की नजर जिन 66 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर पर है, उसमें से 13 सीटें यूपी की हैं जो कि मुस्लिम बहुल हैं जबकि बिहार की चार लोकसभा सीटें शामिल है. यूपी में सहारनपुर, कैराना, रामपुर, बरेली, नगीना, मुरादाबाद, मेरठ, मुज्जफरनगर, बिजनौर, संभल, अमरोहा, बहराइच, श्रावस्ती सीट शामिल है. इसी तरह बिहार के 4 लोकसभा सीट हैं, जिसपर बीजेपी विशेष ध्यान दे रही है. यह सीटें मुस्लिम बहुल बिहार की पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया सीट हैं. ये चारों सीटें बिहार के सीमांचल क्षेत्र की हैं, जहां 30 से 65 फीसदी मुस्लिम आबादी है.

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केरल से जम्मू-कश्मीर की मुस्लिम बहुल सीटें

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बीजेपी केरल की आठ अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर खास तरीके से मशक्कत कर रही है. बीजेपी केरल में मुस्लिमों के साथ-साथ ईसाई समुदाय के वोटों को भी साधने की कवायद में जुटी है. केरल की वायनाड, कासरगोड, कोट्टायम, कोझिकोड, मल्लापुरम, वाडाकारा, पत्थनमथिट्टा, इदुक्की सीटों पर बीजेपी बूथ स्तर पर काम कर रही है ताकि इन पर जीत दर्ज की जा सके. वायनाड वही सीट है जहां से कांग्रेस नेता राहुल गांधी सांसद चुने गए थे हालांकि उनकी सांसदी रद्द की जा चुकी है.

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बीजेपी ने इस बार उन्हें घेरने के लिए जबरदस्त तरीके से तैयारी कर रखी है. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष से लेकर मुस्लिम चेहरा व पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी तक वायनाड का दौरा कर रहे हैं ताकि राहुल गांधी को मात दी सके. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की दो, पश्चिम बंगाल, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना की मुस्लिम बहुल सीटें शामिल हैं.

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अल्पसंख्यक सीटों पर बीजेपी का ‘मोदी मित्र’

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बीजेपी अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए माइक्रोमैनेजमेंट पर काम कर रही है. बीजेपी इन 66 सीटों पर पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के जरिए हर एक लोकसभा क्षेत्र में 5000 ‘मोदी मित्र’ बनाने की रणनीति बनाई है. इस तरह से हर एक विधानसभा क्षेत्र में 750 ‘मोदी मित्र’ बनाकर सियासी समीकरण साधने की कवायद कर रही है. ऐसे लोगों को मोदी मित्र बनाया जा रहा है, जो बीजेपी के कार्यकर्ता नहीं है, लेकिन मोदी नीतियों से प्रभावित हैं.

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बीजेपी मुस्लिम कैंडिडेट उतार सकती है

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बीजेपी सूत्रों का कहना है कि अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के दमदार चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति पर पार्टी काम कर रही है. इस बार पार्टी के पास अल्पसंख्यक वर्ग के जमीनी और मजबूत चेहरे हैं, जिन पर पार्टी दांव लगा सकती है. इस कड़ी में बिहार, यूपी, असम, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर अल्पसंख्यक (मुस्लिम और ईसाई) समुदाय से कैंडिडेट उतारने की तैयारी है ताकि जीत दर्ज कर सकें.

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बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 6 अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवारों को उतारा था. जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और लक्षद्वीप को छोड़कर यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्य के कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं दिया था, लेकिन इस बार पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. ऐसे में बीजेपी अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारकर मास्टर स्ट्रोक चलने की तैयारी की है.

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पीएम मोदी की रैली से माहौल बनाने का प्लान

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अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर सियासी माहौल बनाने के लिए बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा दिंसबर के अंत या फिर जनवरी में पीएम मोदी की रैली कराने की रूप रेखा बनाई है, जो दिल्ली में होगी. इस रैली में अल्पसंख्यक समुदाय के एक लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटाने की तैयारी है ताकि सियासी तौर पर बड़ा संदेश दिया जा सके. इस बार बीजेपी विपक्ष की मुस्लिम वोटों को साधने की रणनीति का काउंटर प्लान तैयार किया है, जिसमें पीएम मोदी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति वाले मंत्र से साधने की कवायद करेंगे.

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