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2024 का रण यूं जीतेगी कांग्रेस? मीडिया विंग में एक-एक कील-कांटा दुरुस्त करने की ये है तैयारी

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आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कमर कस ली है. इसी के मद्देनजर कांग्रेस ने अब अपने मीडिया विभाग को भी धार देने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए पार्टी नई रणनीति के साथ-साथ प्रवक्ताओं का आधिकारिक ऐलान भी करने जा रही है. कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं की ये लिस्ट मंजूरी के लिए पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे के पास भी भेजी जा चुकी है. 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने मीडिया विभाग के कील-कांटे दुरुस्त करने की कांग्रेस की ताजा रणनीति के मुताबिक पार्टी ये कदम उठाने वाली है-

  • पार्टी केंद्र और राज्य के बीच सिनर्जी पर जोर देने जा रही है, जिससे किसी मुद्दे पर कांग्रेस की देशभर में एक ही राय रहे.
  • केंद्र से राज्य, राज्य से जिला और जिले से ब्लॉक स्तर तक समन्वय के लिए हर स्तर पर एक टीम का गठन होगा.
  • केंद्रीय स्तर पर पार्टी के वार रूम में मीडिया और सोशल मीडिया के बीच तालमेल के लिए भी एक टीम गठित की जाएगी.
  • जवाबदेही के साथ राज्यवार 40 सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर दिए गए हैं. साथ ही सोशल मीडिया में और प्रोफेशनल्स रखे जाएंगे. एक प्रोफेशनल्स की टीम सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिहाज से कंटेंट तैयार करेगी और दूसरी टीम ये तय करेगी कि कौन सा कंटेंट किस प्लेटफॉर्म में डाला जाए.
  • केंद्र और राज्य के प्रवक्ताओं को कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए बैकडोर से समान विचारधारा के प्रोफेशनल्स की मदद ली जाएगी.

कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने पार्टी की इस रणनीत पर किए गए सवाल का जवाब देते हुए बीजेपी को घेरा. उन्होंने कहा कि बीजेपी की रणनीति तो थोथा चना, बाजे घना है. हम सड़क के मुद्दे, जनता के मुद्दे मीडिया और सोशल मीडिया पर उठा रहे हैं. हम पहले उदार थे, अब आक्रामक हैं और आक्रामक होकर मोदी जी के झूठों का पर्दाफाश कर रहे हैं.

इसके अलावा पार्टी ने तय किया है कि वो आक्रामक तेवर के साथ ही रहेगी. उदाहरण के तौर पर बीजेपी ने कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा के सामने प्रवक्ता भेजने से मना किया तो कांग्रेस ने बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया और आरएसएस समर्थक संगीत रागी के सामने अपना प्रवक्ता भेजने से मना कर दिया.

मीडिया पर नजर रखेगा पार्टी का एक पैनल

इतना ही नहीं पार्टी एक पैनल का भी गठन करेगी जो मीडिया पर नजर रखेगा. एजेंडा चलाने वालों का बहिष्कार किया जाएगा और उसकी जगह वैकल्पिक मीडिया का इस्तेमाल किया जाएगा. इस बावत टीम इंडिया गठबंधन की मुंबई में होने वाली बैठक में सामूहिक चर्चा करके अंतिम फैसला लिया जाएगा. यानी टीम इंडिया के भीतर समन्वय के लिए भी एक समिति का गठन होगा.

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