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क्या सनातन की बहस बीजेपी के लिए रामबाण बनती जा रही है?

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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए केंद्र में सत्तारुढ़ NDA को माकूल जवाब देने को लेकर विपक्षी दलों ने INDIA नाम से गठबंधन बनाया है. जिस तरह से INDIA गठबंधन अपने मिशन को धार दे रहा है और लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है. उसे देखते हुए बीजेपी की अगुवाई वाली NDA के सामने स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई, इसे इस नजरिए से भी देखा जा सकता है कि सत्ता पक्ष के लोग INDIA पर लगातार हमला कर रहे हैं. विपक्ष की ओर से कई मुद्दों पर केंद्र पर हो रहे हमलों के बीच अब सनातन का मसला उसके लिए नई संजीवनी के रूप में सामने आया है. आम चुनाव को लेकर अब सालभर से कम का समय बचा हुआ है. INDIA गठबंधन तेजी से आगे बढ़ता दिख रहा है. गठबंधन में 26 से ज्यादा दल शामिल हैं. पिछले 10 सालों से सत्ता पर काबिज NDA के खिलाफ INDIA गठबंधन जिस तरह से नए तेवर के साथ लगातार हमले कर रहा है, उसे देखते हुए सत्तारुढ़ गठबंधन को नए सिरे से प्लान बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है. हालांकि इसी महीने की शुरुआत में तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन को लेकर ऐसा बयान दिया कि बैठे-बिठाए ही NDA को बड़ा मुद्दा मिल गया. यह ऐसा मुद्दा है जिस पर कांग्रेस समेत कई दलों को तो जवाब देते भी नहीं बन रहा है.

सनातन के आगे जरुरी मुद्दे पीछे

पिछले 10 सालों से सत्ता पर काबिज बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष कई मोर्चे की नाकामी को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला करता रहा है. विपक्ष लगातार जनभावनाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहा है. तेजी से बढ़ रही महंगाई से जुड़ा मुद्दा हो या फिर रोजगार से जुड़ा मामला या फिर मणिपुर हिंसा, अडानी से जुड़ा मसला हो, ऐसे ढेरों मामले हैं जिन्हें विपक्ष लगातार उठा रहा है. आम जनता से जुड़े इन मुद्दों में उलझी बीजेपी सरकार के सामने सनातन से जुड़ा यह नया मामला ‘रामवाण’ के रूप में सामने आया है. उसकी कोशिश है कि इसके जरिए अगले साल की चुनावी वैतरणी को पार कर लिया जाए.

धार्मिक ध्रुवीकरण का मामला कुछ ऐसा है कि इसके आगे विपक्ष के सारे हथियार धरे के धरे रह जाएंगे और सब फेल हो जाएंगे. 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐसे ही ध्रुवीकरण के जरिए विपक्ष के सारे गणित को फेल कर दिया था. प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था, “अगर रमजान में बिजली आती है तो दिवाली में भी बिजली आनी चाहिए. अगर कहीं पर कब्रिस्तान है तो वहां श्मशान भी होना चाहिए. शासन का मंत्र भेदभाव नहीं सबका साथ सबका विकास का है.” इस बयान के बाद यूपी चुनाव में कब्रिस्तान-श्मशान का मुद्दा बीजेपी के लिए बड़ा हथियार बन गया और इसे चुनावी एजेंडा सेट कर दिया. धार्मिक स्तर पर किए जा रहे भेदभाव को उठाकर बीजेपी ने प्रदेश की सियासी फिजा की रंगत ही बदल दी. नतीजा बीजेपी के पक्ष में रहा. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इसी पैटर्न पर चुनाव लड़ा था. इस बार आतंकवाद को मुद्दा बनाया. पीएम मोदी ने एक रैली में कहा था कि आतंकवादियों ने समाजवादी पार्टी के चुनाव निशान साइकिल पर बम रखे थे. आखिर साइकिल पर ही बम क्यों रखे जाते थे. समाजवादी पार्टी ने आतंकवादियों को बचाने का काम किया. इस बार भी बीजेपी का यह तरीका भी कामयाब रहा.

कहां से शुरू हुआ सनातन विवाद

पहले जान लेते हैं कि सनातन से जुड़ा मामला आया कहां से. हुआ यह कि एक सितंबर को चेन्नई के कामराजार एरिना में सनातन उन्मूलन सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन भी शामिल हुए. उन्होंने अपने भाषण में कहा, “इस सम्मेलन का टाइटल बहुत अच्छा है. आप लोगों की ओर से ‘सनातन विरोधी सम्मेलन’ की जगह ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ का आयोजन किया गया है. मेरी ओर से इसके लिए मेरी बधाई. हमें कुछ चीज़ों को निश्चित तौर पर खत्म करना होगा.” रुपहले पर्दे से राजनीति में आए उदयनिधि यहीं नहीं रुके और उन्होंने अपने भाषण में कहा, “जिस तरह हम लोग मच्छर, मलेरिया, डेंगू और कोरोना की बीमारी को खत्म करते हैं उसी तरह हमारे लिए सनातन धर्म का विरोध करना ही काफी नहीं होगा, इसे समाज से पूरी तरह खत्म करना होगा.” सनातन को लेकर दिए इस बयान के बाद तो सियासत ही गरमा गई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई. यह अभी भी जारी है. इसके जल्द खत्म होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं.

हमारे धर्म पर हमलाः जेपी नड्डा

सनातन के खात्मे को लेकर की गई टिप्पणी के बाद बीजेपी को मानो यह बड़ा मुद्दा ही मिल गया और उसकी ओर से तीखे हमले किए जाने लगे. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि ये हमारे धर्म पर हमला है. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि देश के 80% लोगों के कत्ल का आह्वान किया जा रहा है क्योंकि ये लोग तो सनातन धर्म का पालन करते हैं. सनातन के खात्मे को लेकर दिए बयान के बाद जिस तरह से बीजेपी और कई हिंदुवादी संगठनों की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं, तथा विपक्षी गठबंधन INDIA से जुड़े कई दलों के लिए असहज सी स्थिति बन गई है. उसे देखते हुए उदयनिधि की ओर से सफाई भी पेश की गई कि उनकी ओर से हिंदुत्व और हिंदुओं के खिलाफ कुछ नहीं कहा गया है. मैं सनातन धर्म में बढ़ावा देने वाले कुप्रथाओं और गैरबराबरी की निंदा करता हूं. मैं सनातन को लेकर बार-बार बोलता रहूंगा.

PM ने INDIA गठबंधन पर साधा निशाना

सनातन को लेकर जुड़े विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हो गए. उन्होंने 2 दिन पहले छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कोडातराई में जनसभा में अपने संबोधन के दौरान INDIA गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि देशवासियों को इन लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह गठबंधन हमारी संस्कृति और देश को मिटाना चाहता है. पीएम मोदी के बयान के बाद यह साफ होता दिख रहा है कि बीजेपी इस मुद्दे को साल के अंत में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में बनाए रखने के मूड में है. INDIA गठबंधन में सबसे प्रमुख दल है कांग्रेस. बीजेपी के निशाने पर कांग्रेस पार्टी ही है. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गांधी परिवार पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी का एजेंडा ही सनातन धर्म का ‘अनादर’ करना है. छत्तीसगढ़ में परिवर्तन यात्रा के दूसरे चरण को हरी झंडी दिखाने के दौरान राज्य के जशपुर में आयोजित एक रैली में नड्डा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी निशाना साधते हुए सनातन धर्म विरोधी टिप्पणियों पर उनसे अपना रुख साफ करने को कहा.

‘सोनिया गांधी चुप क्यों हैं’

जन्माष्टमी के दिन यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सनातन के विरोधियों पर हमला करते हुए कहा कि जो सनातन धर्म रावण के अहंकार, कंस के अहंकार और बाबर तथा औरंगजेब जैसे लोगों के अत्याचार से नहीं मिटा, वह इन सत्ता परजीवियों से क्या मिट पाएगा. बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस मसले पर कह चुके हैं कि अगर सोनिया गांधी इस मामले पर चुप्पी साधे रहेंगी तो यह साफ हो जाएगा कि सनातन धर्म का विरोध करना INDIA गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का हिस्सा है.

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