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हिजाब पहनकर पहुंचीं स्कूल तो टिचर ने भेजा वापस घर, गुस्साए पैरेंट्स ने प्रिंसिपल को घेरा

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जोधपुर के सरकारी स्कूल से एक विचित्र मामला सामने आया जहां स्कूल यूनिफॉर्म का पालन न करने पर 10वीं और 12वीं की मुस्लिम छात्रा को वापस घर भेज दिया गया. मामला पीपाड़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है जहां स्कूलों में यूनिफॉर्म को अनिवार्य करने के बावजूद कुछ मुस्लिम छात्राओं ने इसका पालन नहीं, जिसके कारण उन्हें घर वापस भेज दिया गया. स्कूल प्रशासन का कहना है कि छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के बजाए हिजाब पहन कर स्कूल पहुंची जिसके बाद यह एक्शन लिया गया. स्कूल प्रशासन ने कहा कि सरकार द्वारा सीधा-सीधा आदेश दिए गए हैं कि बच्चों को स्कूल में यूनिफॉर्म में आना जरूरी है. ऐसे में छात्राओं द्वारा इसका पालन न करने पर उन्हें घर वापस भेजा गया. वहीं, बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल अध्यापकों द्वारा बच्चों को उनकी यूनिफॉर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की गई. पेरेंट्स ने आरोप लगाए कि अध्यापकों ने बच्चों को चंबल का डाकू कहा है जो की बिल्कुल न्याय संगत नहीं है.

‘सिर्फ एक मास्क है’ – अभिभावक

अभिभावकों का कहना है कि छात्राओं ने सिर्फ सिर पर स्कार्फ बांधा हुआ था जो की हिजाब में शामिल नहीं होता है. यह सिर्फ एक मास्क के रूप में है. क्या कोई भी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए मास्क नहीं पहन सकता? जिस तरह से मास्क होता है इस तरह से यह बच्चों के सिर पर इसका बांधा गया था. इसे हिजाब कहना गलत है.

क्या है पूरा घटनाक्रम

शनिवार सुबह कुछ छात्राएं सिर पर बुर्के के ऊपर बांधने वाला स्कार्फ, अपनी यूनिफॉर्म के ऊपर बांधकर स्कूल पहुंची थी. इसपर स्कूल प्रशासन ने उन छात्रों को स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल आने को कहा और उन्हें घर भेज दिया. इसके बाद स्कूल छात्राओं के अभिभावक स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रधानाध्यापक का विरोध किया. उन्होंने बच्चों को घर भेजने और उन्हें चंबल का डाकू कहने पर विरोध किया. इस पूरी घटनाक्रम का वीडियो एक अभिभावक द्वारा बना दिया गया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में पुलिस के अधिकारी भी साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं.

अभिभावक स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. वीडियो में अभिभावक कहते हुए नजर आ रहे हैं कि हमारे बच्चे जो पहन के आए थे वह हिजाब नहीं है, वह सिर्फ एक स्कार्फ है. उसे हिजाब कहना गलत है. वीडियो में अभिभावकों द्वारा बच्चों को चंबल का डाकू कहने का विरोध किया जा रहा है. अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक से पूछा कि आपके शिक्षा मंत्रालय से इस तरह का कोई आदेश दिया है क्या?

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