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डॉक्टर ने चलने को मना किया, मगर अस्पताल दौड़ा रहा

भीलवाड़ा। रिपोर्ट टाइम्स।

मुझे फेफड़े में दिक्कत है, फेफड़ों से खून निकलता है। डॉक्टर ने चलने-फिरने के लिए मना किया है। फिर जांच कराने के लिए इधर-उधर दौड़ना पड़ता है। अस्पताल में ना तो जांच की सुविधा है और ना ही सफाई की व्यवस्था। मरीज बहुत परेशान हैं…यह पीड़ा है राजसमंद के आमेट के कांतिलाल की। मगर यह सिर्फ कांतिलाल की परेशानी नहीं, भीलवाड़ा के टीबी अस्पताल आने वाला हर मरीज इतना ही परेशान है…

टीबी मरीजों का मर्ज बढ़ा रहा अस्पताल!

भीलवाड़ा टीबी अस्पताल की बिल्डिंग अंदर से काफी अच्छी नजर आती है। मगर यहां साफ-सफाई के इंतजाम नहीं हैं, लेट बाथ इतने गंदे हैं कि बाहर से निकलने में भी बुरा लगता है। अस्पताल परिसर में कचरे के ढेर लगे हैं। इन सबके बीच मरीज उपचार कराने आते हैं तो उन्हें जांच और सैम्पलिंग में भी भारी परेशानी होती है। मरीज कांतिलाल का कहना है कि अस्पताल में सफाई से लेकर जांच तक की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीज परेशान हैं।

अस्पताल में जांच की सुविधा ही नहीं

कांतिलाल पिछले चार दिनों से टीबी अस्पताल में भर्ती हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर ने चलने को मना किया है, इसके बावजूद उन्हें जांच के लिए दौड़ना पड़ता है। कभी सैम्पल जमा करवाने, कभी एक्स-रे करवाने के लिए जिला अस्पताल या बाहर जाना पड़ता है। क्योंकि अस्पताल में जांच की सुविधा ही नहीं है, यहां जांच के लिए जरुरी उपकरण ही उपलब्ध नहीं है और इस समस्या का खामियाजा अस्पताल आने वाले टीवी मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी थोड़ा भी चलने पर सांस भरने लगती है।

व्हील चेयर, ऑक्सीजन भी नहीं

टीबी अस्पताल की बदहाली का सिर्फ एक ही उदाहरण नहीं है, यहां गंभीर मरीज के आने पर उसे ऑक्सीजन देने तक की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा टीबी मरीजों को आमतौर पर सबसे ज्यादा तकलीफ चलने में होती है, उनका सांस भरने लगता है, मगर अस्पताल में टीबी मरीजों को अंदर तक लाने के लिए व्हील चेयर भी उपलब्ध नहीं है। जिससे मरीजों को पैदल ही रास्ता तय कर डॉक्टर और सैम्पलिंग सेंटर तक पहुंचना पड़ता है।

ड्रिप लगाने के लिए स्टैंड तक नहीं

मरीजों का कहना है कि टीबी अस्पताल में ड्रिप स्टैंड भी नहीं हैं। ड्रिप लगानी होती है तो उसे दीवार पर टांग देते हैं, अगर मरीज थोड़ा भी हिलता है तो ड्रिप खिंच जाती है और आउट हो जाती है। इससे अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदारों को ही ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा गंदगी और अन्य अव्यवस्थाओं से भी अस्पताल आने वाले मरीज और परिजन परेशान हैं। मगर अभी तक अस्पताल की व्यवस्थाओं के सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

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