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“पहले बिल चुकाओ, फिर मिलेगा शव”, मृतक के परिजनों ने लगाई गुहार, अस्पताल पहुंच गए मंत्री किरोड़ीलाल मीणा

REPORT TIMES : कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा रविवार (27 अक्टूबर) सुबह संत दुर्लभजी अस्पताल पहुंचे. वहां दौसा के बालाजी थाना क्षेत्र के रहने वाले विक्रम के परिजनों ने उनसे शिकायत की थी. शिकायत मिली की अस्पताल प्रशासन पैसे बकाया होने का कहकर मृतक का शव नहीं दे रहा है. कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि इस अस्पताल को एक रुपये में जमीन दी गई थी. विक्रम 13 अक्टूबर को भर्ती हुआ था. उन्होंने 6 लाख 39 हजार रुपये का भुगतान किया, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी परसों मृत्यु हो गई. अब अस्पताल प्रबंधन 1 लाख 79 हजार रुपये का बकाया बिल मांग रहा है और शव देने से इनकार कर रहा है. हालांकि कृषि मंत्री के यहां पहुंचने के बाद अस्पताल प्रशासन ने शव देने के लिए कह दिया. इस पर मंत्री ने नाराजगी जाहिर की और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ पुलिस को शिकायत दर्ज करने के भी निर्देश दिए.

मृतक के परिजन बोले- बॉडी से बदबू आ रही थी

वहीं, मृतक विक्रम के परिजन ने बताया कि हमनें कल जब अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाया, तब जाकर हमें विक्रम को देखने दिया. उसकी बॉडी में से बदबू आ रही थी. हमें अंदेशा है उसकी मौत पहले ही हो गई थी. बालाजी थाने से मृतक का शव लेने आए पुलिसकर्मी गोविंद सिंह ने बताया कि मैं कल 7 बजे पहुंच गया था. यहां डॉ. विजयन्त शर्मा से मिला और उन्होंने 1 लाख 79 हजार का बकाया बिल बताकर शव देने से मना कर दिया.

विक्रम के परिजन.

विक्रम के परिजन.

इन मामलों में भी मंत्री ने लिया संज्ञान

ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आए. 14 अक्टूबर को मोनू मीणा को अपेक्स हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था. 24 घंटे भर्ती रहने पर अस्पताल ने साढ़े आठ लाख रुपए का बिल थमा दिया. महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती काजल का लाखों रूपए का बिल बनाया गया. इसी बीच हनुमानगढ़ जिला प्रमुख कविता मेघवाल भी किरोड़ीलाल मीणा से मिलने पहुंचीं. उन्होंने बताया कि उनकी बहू कौशल्या भाटिया अस्पताल में भर्ती है और उसका छह लाख रुपए का बिल बना दिया गया है.

किरोड़ीलाल मीणा बोले- सरकार को बदनाम करने की साजिश

किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि इन मरीजों को राजस्थान सरकार की मां योजना से लिंक नहीं किया गया है, इसलिए इन्हें खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ा. सरकार पैसा दे रही है, लेकिन अस्पताल इन्हें योजना से जोड़ नहीं रहे हैं. यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है, क्योंकि पात्र होते हुए भी मरीजों को योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा.

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