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RTH के लिए सड़कों पर धरती का ‘दूसरा भगवान’, सरकार से जंग जारी…पर क्या सोचती है पब्लिक?

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जयपुर: साल 2020, मार्च का महीना…इस धरती पर बसने वाली इंसानी कौम पर कोरोना महामारी के रूप में सबसे बड़ी त्रासदी की आहट हुई जहां कितनी ही जानें एक महामारी लील कर गई. महामारी के काल में जिंदगियां बचाने का जिम्मा धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले ‘डॉक्टरों’ के कंधों पर था जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर कोरोना महामारी का पुरजोर मुकाबला किया. कोरोनाकाल में डॉक्टरों के ऊपर फूलों की बारिश हुई, उनकी आरती उतारी गई…वही डॉक्टर देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य राजस्थान में इन दिनों एक कानून को लेकर सरकार से लड़ रहे हैं, जहां महामारी के दौर में अस्पताल मरीजों से अटे पड़े थे और डॉक्टर 24 घंटे सेवाएं दे रहे थे, वहीं अब सूबे के प्राइवेट अस्पतालों पर ताला लटका है और डॉक्टर सड़कों पर उतर आए हैं. वजह है राजस्थान सरकार की तरफ से लाया गया एक कानून ‘राइट टू हेल्थ’, जिसमें सरकार हर नागरिक को इलाज की गारंटी देने का वादा कर रही है वहीं राज्य के निजी अस्पताल इसे उनकी बुनियाद के खात्मे का ऐलान बता रहे हैं. प्रदेश में प्राइवेट अस्पताल पिछले 12 दिनों से हड़ताल पर हैं जहां वह राइट टू हेल्थ बिल को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं.

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वहीं बिल को लेकर ताजा स्थिति यह है कि 21 मार्च को सरकार ने विधानसभा में सर्वसम्मति से बिल पारित करवा दिया जिसके बाद लगातार कानून वापस लेने को लेकर विरोध चल रहा है. वहीं शुक्रवार को बिल राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंच गया है जिसके बाद अब सारी निगाहें राज्यपाल के ऊपर टिकी है. इस बीच आइए जानते हैं निजी अस्पतालों और सरकार के बीच छिड़ी इस जंग में आम जनता कैसे मुश्किलों का सामना कर रही है और वह इस बिल को लेकर क्या सोचती है.

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‘हमें तो बस डॉक्टर मिल जाए’

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राजधानी जयपुर में जेएलएन मार्ग पर स्थित फ़ोर्टिस अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के बाद से ही सन्नाटा पसरा हुआ है जहां अस्पताल के बाहर सेवाएं बंद है का नोटिस चस्पा है और वहीं मौजूद सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि डॉक्टर हड़ताल पर है. अस्पताल के बाहर दौसा से आए मोहनलाल बताते हैं कि मेरी पत्नी का यहां काफी समय से इलाज चल रहा है जिसके लिए इलाज की तारीख पर आए थे लेकिन पता चला कि डॉक्टर नहीं है, ऐसे में अब हम कहां जाएं, किसी और डॉक्टर को हम दिखा नहीं सकते हैं.

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वहीं बिल को लेकर मोहनलाल कहते हैं कि जो भी चल रहा है उस पर जल्दी समाधान निकले, हम तो चाहते हैं कि जो इलाज हमें यहां मिल रहा है वैस ही सरकारी में मिले, तो यहां फिर आना ही क्यों पड़ेगा. इसके अलावा एसएमएस अस्पताल के बाहर मौजूद कई लोगों का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल बंद होने से यहां अचानक से मरीजों का लोड बढ़ गया जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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‘बातचीत करने में क्या बिगड़ रहा है’

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वहीं राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुछ टीचरों का कहना है कि बिल को लेकर अगर कहीं मामला फंसा हुआ है तो चाहे डॉक्टर हो या सरकार बात करके समाधान निकालना चाहिए, अगर सरकार कोई बिल लाई है तो वह जनता के लिए है और उस जनता में डॉक्टर भी तो आते हैं ऐसे में प्रदेश की चरमराई हुई स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए हर पक्ष को वार्ता के लिए तैयार रहना चाहिए.

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कोर्ट ने लगा दी वकीलों को ही फटकार

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इधर शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में निजी अस्पतालों की हड़ताल के खिलाफ दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकीलों को ही फटकार लगा दी. कोर्ट में कार्यवाहक सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस अनिल उपमन की खंडपीठ ने कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल को गलत बताने वाले वकील कौन होते हैं और वह कौनसी नैतिकता के साथ पैरवी कर रहे हैं जो खुद एक महीने के कार्य बहिष्कार के बाद काम पर लौटे हैं. इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले पर राजस्थान सरकार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, राजस्थान मेडिकल कांउसिल सहित डॉक्टरों की एसोसिएशन से 11 अप्रैल तक लिखित में जवाब मांगा है. वहीं अदालत ने राज्य सरकार और डॉक्टरों के बीच हुई अब तक की सभी वार्ताओं का ब्यौरा भी पेश करने को कहा है

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