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बीजेपी के सबसे बड़े नेता पीएम ‘मोदी’ पर सीधा प्रहार, कांग्रेस की बदली सोच के पीछे क्या है रणनीति?

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सोशल मीडिया हो या फिर कांग्रेस के प्रवक्ताओं या नेताओं की भाषा, कांग्रेस के निशाने पर पीएम मोदी सीधे तौर हैं. कर्नाटक और हिमाचल में मिली कांग्रेस की जीत के बाद कांग्रेस पार्टी इस रणनीति पर बढ़-चढ़कर काम कर रही है. यही वजह है कि नेहरू मेमोरियल के नाम बदलने को लेकर प्रतिक्रिया हो या फिर राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा, कांग्रेस अब सीधा पीएम मोदी पर हमले करने से परहेज नहीं कर रही है. दरअसल, हिमाचल और कर्नाटक में मिली कांग्रेस की जीत से कांग्रेस की सोच पर खासा असर पड़ा है. दोनों जगहों के चुनाव में बीजेपी पीएम मोदी के ही चेहरे पर चुनाव लड़ रही थी. यहां बीजेपी ने पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगे थे. जाहिर है कर्नाटक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पीएम मोदी की तुलना सांप से कर डाली थी, लेकिन बीजेपी इसे मुद्दे बनाने में कामयाब नहीं हो पाई. कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी ने उल्टा इसके जवाब में कहा था कि मेरे भाई राहुल गांधी देश के लिए गाली क्या गोली तक खाने को तैयार हैं. वहीं प्रियंका ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था कि जितनी गाली उन्हें और उनके परिवार को दी गई है उसकी पूरी किताब तैयार की जा सकती है.

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कांग्रेस और राहुल गांधी की लोकप्रियता में हुआ इजाफा

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प्रियंका पीएम मोदी के उस बात का जवाब दे रही थीं जब पीएम मोदी ने कर्नाटक के चुनाव में कहा था कि कांग्रेस उन्हें 91 तरह की गालियों से नवाज चुकी है. बीजेपी चुनाव में इसे ओबीसी का अपमान बताकर प्रचारित करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन जनता का रुख कांग्रेस के पक्ष में ही रहा और कांग्रेस भारी बहुमत से जीतने में कामयाब रही है. जाहिर है साल 2014 और साल 2019 में मिली बीजेपी को प्रचंड जीत के बाद कांग्रेस ‘नीच’ और ‘चायवाला’ जैसे शब्दों के बोले जाने का पश्चाताप कर रही थी. कांग्रेस में इस बात को लेकर कंफ्यूजन घर कर गया था कि बीजेपी के सर्वोधिक लोकप्रिय नेता पर सीधा हमला करने से बचा जाय या हमले की रणनीति पर ही आगे बढ़ा जाय.

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जाहिर है पार्टी सालों तक हार की वजहों से असमंजस की स्थिति में रही है, लेकिन राहुल गांधी पीएम मोदी पर डायरेक्ट हमले की रणनीति पर काम करते रहे हैं. साल 2019 में भी कांग्रेस ‘चौकीदार चोर है’ के नारों के साथ पीएम मोदी को घेरने के प्रयास कर रही थी, लेकिन कांग्रेस का ये प्रयास काउंटर सफल न रहकर प्रोडक्टिव साबित हुआ था, लेकिन पिछले कुछ समय से माहौल में तब्दीलियां दिखाई पड़ रही हैं. पिछले नौ सालों की एंटी इनक्मबेंसी की वजह से एक तबका बीजेपी से सवाल पूछने को पसंद करने लगा है. यही वजह है कि अमेरिका हो या इंग्लैंड या फिर संसद में अडानी के मसले को जोर से उठाने की बात हो, राहुल गांधी सहित कांग्रेस के पहली पंक्ति के नेता अब सीधा पीएम मोदी पर हमले करने लगे हैं. इस हमले से कांग्रेस और राहुल गांधी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है ऐसा कुछ सर्वे और चुनाव के परिणाम से साबित हो रहा है.

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राहुल के आक्रामकता की वजह क्या है?

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कांग्रेस में भारत जोड़ो यात्रा के बाद थोड़ी एकजुट नजर आने लगी है. कांग्रेस के एक्शन में एकरूपता और संगठन के स्तर पर अध्यक्ष के तौर मल्लिकार्जुन खरगे सहित मीडिया मैनेजर के तौर पर जयराम रमेश बेहद एक्टिव नजर आ रहे हैं. राहुल गांधी की विश्वस्त टीम में पूर्व जेएनयू छात्रसंघ के नेता कन्हैया कुमार, सुप्रिया श्रीनेत सहित अखिलेश प्रसाद सिंह जैसे कई नेता संचार माध्यमों पर एक्टिव दिखाई पड़ रहे हैं और बीजेपी के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता पीएम मोदी के फैसलों पर कड़ी प्रतिक्रिया देने से हिचक नहीं रहे हैं.राजनीतिक विश्लेषक डॉ संजय कुमार सिंह कहते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी परिपक्व नेता के तौर पर उभरे हैं और इसकी बानगी लोकसभा में तब दिखाई पड़ी थी जब भारत जोड़ो का जिक्र करते हुए राहुल गांधी अडानी मसले पर पीएम मोदी को घेरने में बहुत हद तक सफल दिख रहे थे. डॉ संजय आगे कहते हैं कि राहुल गांधी की सदस्यता ‘मोदी’ सरनेम पर टिप्पणियां के बाद खत्म हो गईं, लेकिन राहुल गांधी के तीखे बयान को अमेरिका से लेकर देश भर में सुनने वालों की तादाद पहले की तुलना में तेजी से बढ़ी है. पिछले नौ सालों के एंटी इन्कमबेंसी को कांग्रेस भुनाने के लिए मुस्तैदी से तैयार दिख रही है इसलिए कांग्रेस इस सोच पर काम कर रही है. बीजेपी के ‘तुरूप के इक्के’ पर ही सीधे हमले से कांग्रेस सत्ता में वापसी कर सकती है. मतलब साफ है कि जब तक पीएम मोदी के इमेज पर डेंट नहीं पहुंचाया जाएगा तब तक कांग्रेस नेशनल लेवल के चुनाव में सफल नहीं सकेगी, ऐसा कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में विश्वास घर कर चुका है.

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पीएम मोदी हर मोर्चे पर हैं निशाने पर

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बालासोर में ट्रेन हादसा हो या फिर राहुल गांधी की अमेरिका से लेकर इंग्लैंड की यात्रा. यहां पीएम मोदी ही सीधे निशाने पर होते हैं. कांग्रेस द्वारा सीधे हमले की वजह साफ है कि अगर पीएम मोदी हर छोटे बड़े काम का सेहरा अपने सिर पर बांधते हैं तो बालासोर की दुर्घटना के लिए पीएम मोदी के अलावा दूसरा कौन जिम्मेदार हो सकता है. इसलिए कांग्रेस एक रणनीति के सहारे पीएम मोदी को आर्थिक मोर्चे के अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्दे और घरेलू मोर्चे पर महंगाई और बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है. कांग्रेस राहुल गांधी के मुंह से सीधा हमले करा रही है ताकी मोदी विरोधी की राह में राहुल के मुकाबले कोई नेता दूर दूर तक दिख न सके. राहुल गांधी अमेरिका यात्रा पर होते हैं तो पीएम मोदी का मजाक यह कर उड़ा देते हैं कि पीएम मोदी भगवान को भी ब्रह्मांड की संरचना के बारे में ज्ञान देने का अवसर नहीं गंवाने वाले हैं. पीएम मोदी पर ये कड़ा प्रहार विदेश की धरती पर किया गया है. मकसद साफ है कि विदेश नीति में सफल पीएम मोदी को वहां भी घेरा जा सके और उनकी सफलता को बकवास बताकर उन्हें असफल नेता करार दिया जा सके. हर विदेश यात्रा से पहले और बाद में बीजेपी पीएम मोदी की यात्रा को घरेलू राजनीति में खूब भुनाती रही है इसलिए कांग्रेस पिछले एक साल से इस मोर्चे पर भी देश और विदेश की धरती पर पीएम मोदी को घेरने का काम कर रही है.

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पीएम मोदी का पलड़ा फिलहाल भारी

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राहुल गांधी पीएम मोदी को भ्रष्टाचार के मसले पर भी घेरने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लगे हैं. पीएम मोदी का संबंध अडानी से सीधा जोड़ने का प्रयास कर पीएम मोदी की सरकार को भ्रष्ट बताने का प्रयास लोकसभा में किया गया. बीजेपी सरकार को घेरने का प्रयास कर पीएम मोदी से सीधा जवाब कांग्रेस मांग रही थी. बीजेपी लगातार इसका जबाव कांग्रेस की 80 फीसदी सरकार को भ्रष्ट बताकर दे रही है. आरोप प्रत्यारोप के इस दौर में पीएम मोदी का पलड़ा फिलहाल भारी है, लेकिन कांग्रेस की बातों के सुनने वालों की संख्या में काफी तेजी इजाफा हो रहा है. CSDS-Lokniti और मूड ऑफ द नेशन के सर्वे में राहुल गांधी की लोकप्रियता पिछले नौ सालों की तुलना में काफी बढ़ी है इसलिए राहुल और कांग्रेस पीएम मोदी पर सीधे हमले की स्ट्रैटजी पर बढ़ चढ़कर काम कर रहे हैं.

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