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तिजारा सीट पर BJP को लगा था जोर का झटका, क्या कांग्रेस को मिलेगी कामयाबी

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है. यहां पर 25 नवंबर को वोटिंग कराई जाएगी. राजस्थान के अलवर जिले में भी खासी हलचल देखी जा रही है. जिले के तहत 11 विधानसभा सीटें आती हैं जिसमें 7 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी तो भारतीय जनता पार्टी को महज 2 सीटों पर संतोष करना पड़ा. हालांकि 2 सीट निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में भी गई थी. जिले की तिजारा सीट पर 2018 में बहुजन समाज पार्टी ने जीत हासिल की थी, बाद में विधायक कांग्रेस में चले गए थे. कांग्रेस ने इस सीट से अभी कोई उम्मीदवार घोषित नहीं किया है जबकि बीजेपी ने योगी बाबा बालकनाथ को मैदान में उतार दिया है.

कितने वोटर, कितनी आबादी

2018 के चुनाव में तिजारा विधानसभा सीट पर 14 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला था, लेकिन अंतिम दौर तक यहां मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया. बहुजन समाज पार्टी के संदीप कुमार को 59,468 वोट मिले तो कांग्रेस के एमादुद्दीन अहमद खान के पक्ष में 55,011 वोट आए. जबकि चुनाव में बीजेपी तीसरे स्थान पर खिसक गई. बीजेपी के संदीप दायमा को 41,345 वोट मिले. यहां पर समाजवादी पार्टी के फजल हुसैन को 22,189 वोट मिले. कड़े संघर्ष के बाद तिजारा सीट बसपा के संदीप कुमार के पक्ष में गई. उन्होंने यह चुनाव 4,457 मतों के अंतर से जीत लिया. तब के चुनाव में तिजारा सीट पर कुल वोटर्स की संख्या 2,13,153 थी जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1,13,306 थी तो महिला वोटर्स की संख्या 99,847 थी. इसमें से कुल 1,82,672 (86.1%) वोटर्स ने वोट डाले. NOTA के पक्ष में 856 (0.4%) वोट ही पड़े.

कैसा रहा राजनीतिक इतिहास

तिजारा विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो यहां पर किसी एक दल का दबदबा नहीं रहा है. 1990 से लेकर अब तक के चुनाव में जनता दल, कांग्रेस और बीजेपी समेत कई दलों को जीत मिल चुकी है. मुस्लिम बहुल इस सीट पर मुकाबला कड़ा ही रहा है. कांग्रेस के टिकट पर एमादुद्दीन अहमद खान ने 3 बार यहां पर जीत हासिल की. एमादुद्दीन अहमद 1993 के बाद 2003 और 2008 के चुनाव में भी विजयी रहे थे.बीजेपी को तिजारा सीट पर 2013 में पहली बार यहां पर जीत मिली और ममन सिंह यहां से विधायक चुने गए. फिर 2018 में कांग्रेस के संदीप यादव चुनाव जीतने में कामयाब रहे. इस सीट से जगमल सिंह 3 बार विधायक बने और 3 अलग-अलग दलों के टिकट पर. पहले वह लोकदल (1985) से चुने गए फिर जनता दल (1990) के टिकट पर. इसके बाद वह राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर 1998 में विधायक बने.हालांकि तिजारा विधानसभा के लिए इस बार बीजेपी की ओर से टिकट सांसद बाबा बालकनाथ को टिकट दिए जाने के बाद नाराजगी देखी जा रही है. यहां से टिकट की मांग करने वाले कई दावेदारों में से पूर्व विधायक मामन सिंह भी शामिल थे, लेकिन अब टिकट नहीं मिलने पर भी निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

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