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नारी शक्ति ने बढ़ाया देश का मान…पर उसे क्यों है इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट की दरकार?

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भारत की रक्षा शक्ति में नारी शक्ति की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर नारी शक्तियों ने देश का मान बढ़ाया. पहली बार तीनों सशस्त्र बलों की पूर्ण महिला मार्चिंग टुकड़ी ने देश की बढ़ती ‘नारी शक्ति’ को दर्शाते हुए कर्तव्य पथ पर मार्च किया. गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर देश की नारी शक्ति का भव्य स्वरूप भारत ही नहीं पूरे विश्व ने देखा. मगर अफसोस कि भारत की सशस्त्र सेनाओं में केवल 7000 से अधिक महिला अधिकारी हैं. महिलाओं के प्रतिनिधित्व में सुधार होने की दरकार है. यह कहना है स्क्वाड्रन लीडर (रिटायर) दीप्ति काला का. दरअसल, 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर न्यूज9 ने महिलाओं के एक पैनल से बातचीत की. इस पैनल में स्क्वाड्रन लीडर (रिटायर) दीप्ति काला, फेमस राइटर अर्चना गरोडिया गुप्ता, वकील रेबेका जॉन और फेमस ऑथर एंड स्क्रीन राइटर अद्वैत कला शामिल थीं. सभी ने अपने-अपने विचार रखे. इस दौरान स्क्वाड्रन लीडर (रिटायर) दीप्ति काला ने भारतीय सेना में महिलाओं की निराशाजनक हिस्सेदारी पर सवाल उठाया.

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हमें और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट की आवश्यकता

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दीप्ति काला ने कहा, ‘गणतंत्र दिवस पर हम भले ही महिलाओं की वर्दी पहनने का जश्न मनाते हैं. मगर हकीकत यही है कि भारत की सशस्त्र सेनाओं में सिर्फ 7000 से अधिक महिला अधिकारी हैं, जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी सेना है. महिलाएं सागर में एक बूंद मात्र हैं. हम उन्हें आर्म्ड फोर्स में कैसे शामिल कर सकते हैं? उन्होंने आगे कहा, हमें अधिक रोल मॉडल और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट की आवश्यकता है. यही एकमात्र चीज है जिसकी अभी भी बड़े पैमाने पर कमी है, जो कहीं न कहीं हमें पीछे खींच रही है.

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कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना होगा

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बता दें कि स्क्वाड्रन लीडर काला सशस्त्र बलों में एक दशक तक सेवा करने और यूनिट की कमान संभालने के बाद वर्दी छोड़ने का फैसला किया. वहीं, गरोडिया गुप्ता ने कहा कि वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में भारत की फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 19.2 फीसदी था, जो देश के जीडीपी में 17 फीसदी का योगदान देता है. मगर यह 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देखने वाले देश के लिए अपेक्षाकृत कम है. उन्होंने कहा कि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना होगा तब स्थिति और अच्छी होगी.

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50 फीसदी हो महिलाओं की भागीदारी

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वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय महिलाएं अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद का 17 फीसदी योगदान देती हैं, जो वैश्विक औसत के आधे से भी कम है. अगर करीब 50 फीसदी महिलाएं कार्यबल में शामिल हो जाएंगी तो भारत अपनी वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 9 फीसदी वार्षिक तक पहुंच सकता है.

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