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जयपुर के बंटवारे से रिपीट होगी सरकार! क्या BJP के शहरी वोटों में सेंध लगा पाएंगे गहलोत?

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जयपुर: राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में 19 नए जिलों की घोषणा कर सूबे की सियासत में चर्चा के केंद्र बदल दिए हैं. गहलोत की इस घोषणा के बाद जहां कांग्रेसी खेमा इसे मास्टरस्ट्रोक मान रहा है वहीं बीजेपी की ओर से ठंडी प्रतिक्रिया सामने आई है. गहलोत सरकार ने राज्य में 19 जिले नए बनाए हैं जिनमें बीजेपी और कांग्रेस विधायकों के इलाके होने के साथ ही कई निर्दलीय और जातिगत समीकरणों को साधा गया है. वहीं कुछ जिलों की मांग काफी समय से हो रही थी तो कुछ जिले ऐसे बनाए गए हैं जहां कांग्रेस की विधानसभा सीटें कमजोर रही हैं. इस बीच जयपुर शहर का दो हिस्सों में बंटवारा करना हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है जहां बीजेपी का कहना है कि जयपुर को दो जिलों में बांटने की कहीं भी मांग नहीं थी. हालांकि जानकारों का कहना है कि जयपुर को दो हिस्सों में बांटकर कांग्रेस सीधे तौर पर हेरिटेज और ग्रेटर निगम की तरह वोट बैंक साधने में जुटी है. बता दें कि राजधानी में शहरी वोटर्स सालों से बीजेपी के साथ रहा है और कांग्रेस की ग्रामीण वोटों में पकड़ है जहां नए जिलों की घोषणा कर जातिगत रणनीति भी अपनाई गई है. जयपुर उत्तर जिले में ब्राह्मण, माली, मुस्लिम और गुर्जर-मीणा सीटें हैं जिनमें शहरी इलाकों की हवामहल, विद्याधर नगर, सिविल लाइंस और ग्रामीण इलाकों में आमेर, शाहपुरा, चौमूं, विराटनगर तथा जमवारामगढ़ सीटें शामिल है.

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बीजेपी को कमजोर करने की गहलोत की रणनीति

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गहलोत सरकार ने दूदू ग्राम पंचायत को जिला बनाकर वहां के विधायक बाबूलाल नागर को मजबूत करने की कोशिश की है. वहीं, जयपुर का परकोटा इलाता जहां बीजेपी का काफी प्रभाव रहा है वहां की किशनपोल, हवामहल, मालवीय नगर और सिविल लाइन्स के बीच जिलों की लाइन खींचकर बीजेपी को कमजोर करने की कोशिश की गई है. हालांकि जिलों की लाइन खींचने के साथ इसमें विधानसभा क्षेत्र को तोड़ा नहीं जा सकता है. माना जा रहा है कि दूदू से वर्तमान विधायक बाबूलाल नागर का पिछले चुनाव में कांग्रेस ने टिकट काटा था और अब दूदू को जिला बनाने के बाद उनकी पकड़ वहां मजबूत की गई है.

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हेरिटेज और ग्रेटर निगम के हिसाब से बनेगी रणनीति !

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वहीं जयपुर से लगते कोटपूतली-बहरोड़ को जिला बनाया गया है जहां कोटपुतली में 41 हजार गुर्जर और 36 हजार यादव वोटर हैं जिनको लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों जोर आजमाइश कर रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस ने यादवों से गुर्जर वोटरों को अलग करने की रणनीति के तहत इन्हें जिला बनाया है.वहीं जयपुर का हेरिटेज और ग्रेटर नगर निगम के हिसाब से अगर बंटवारा होता है तो यहां 1 जिला प्रमुख मुस्लिम समुदाय से आएगा जिससे शहरी क्षेत्र में बीजेपी को कमजोर करने के लिए यह भी कांग्रेस का एक दांव माना जा रहा है. इसके अलावा दूदू इलाके में ओबीसी, मुस्लिम व एससी वोटर्स हैं जो सालों से कांग्रेस का कोर वोट बैंक रहा है. इसी तरह कोटपूतली-बहरोड़ में बानसूर-नीमराना के साथ मेवात के छोटे गांवों को जोड़ा जा सकता है जिससे मेव, यादव और एससी वोटों को साधने की कोशिश की गई है.

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