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राज्य का हाई प्रोफाइल सीट है वैर, क्या कांग्रेस से सीट छीन सकेगी BJP

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह राजस्थान में भी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. यहां पर भी चुनावी तैयारियां जोरों पर हैं. राजस्थान के भरतपुर जिले की वैर विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. वैसे तो वैर विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा माना जाता है. बीजेपी भी यहां से जीत का स्वाद चख चुकी है. हाई प्रोफाइल वैर सीट पर अभी कांग्रेस के भजन लाल जाटव का कब्जा है. साल 2018 के विधानसभा चुनाव में वैर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने भजन लाल जाटव को पसंद किया और दूसरी बार विधायक बनाया. राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजन लाल को पहले राज्य मंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री बनाया.

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कितने वोटर, कितनी आबादी

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अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित वैर सीट पर 2018 को चुनाव में 5 उम्मीदवारों के बीच टक्कर थी, जिसमें मुख्य मुकाबला कांग्रेस के भजन लाल जाटव और बीजेपी के रामस्वरूप कोली के बीच था. भजन लाल को 78,716 वोट मिल जबकि रामस्वरूप को 63,433 वोट मिले. कांग्रेस के भजन लाल को यह जीत 15,283 मतों के अंतर से मिली थी. 5 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में कल वोटर्स की संख्या 2,40,528 थी जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,29,128 थी जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 1,11,400 थी. इसमें से 69.5% लोगों यानी 1,65,853 वोटर्स ने वोट डाले थे. 1,356 लोगों ने नोटा को वोट दिया था.

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कैसा रहा राजनीतिक इतिहास

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भरतपुर जिले से जुड़े वैर सीट पर पिछले 5 चुनावों पर नजर डालें तो 3 बार कांग्रेस तो 2 बार बीजेपी विजयी रही है. 1998 और 2003 में यहां से कांग्रेस विजयी रही थी फिर 2008 और 2013 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी बहादुर सिंह कोली ने जीत दर्ज की थी. लेकिन कोली को फिर भरतपुर से लोकसभा के प्रत्याशी बनाया गया और उन्होंने जीत हासिल भी कर ली. ऐसे में बहादुर सिंह ने वैर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. उस समय राजस्थान में बीजेपी की वसुंधरा सरकार थी. वैर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए गए, लेकिन उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी गंगाराम कोली की हार हुई. कांग्रेस के भजन लाल जाटव ने जीत हासिल की. भजन लाल पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे.

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आर्थिक-सामाजिक ताना बाना

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वैर विधानसभा सीट पर कुल मतदाता करीब 2 लाख 65 हजार हैं जिनमें 1 लाख 42 हजार पुरुष तो 1 लाख 23 हजार के करीब महिला मतदाता हैं. वैर सीट पर ओबीसी वर्ग के मतदाता सबसे ज्यादा संख्या में हैं. ओबीसी वर्ग के करीब 1 लाख 35 हजार मतदाता आते हैं. उसके बाद अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता हैं. वैर विधानसभा सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग के कुल 80 हजार के करीब मतदाता है. अनुसूचित जनजाति के भी लगभग 16 हजार मतदाता हैं. सामान्य श्रेणी के मतदाताओं में ब्राह्मण करीब 15 हजार, वैश्य करीब 11 हजार, राजपूत करीब 6 हजार तथा अन्य समुदाय से 2 हजार मतदाता आते हैं वैर विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक लगभग 63 हजार जाटव मतदाता हैं और दूसरे नंबर पर 48 हजार के लगभग जाट मतदाता हैं. गुर्जर जाति के करीब 31 हजार मतदाता तीसरे नंबर पर हैं. इन्हीं जातियों के मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. अब देखने वाली बात यह है कि इस बार चुनाव में कांटे की टक्कर होगी. वैर विधानसभा क्षेत्र में गुर्जर वोट भी काफी संख्या में है जो पिछली बार सचिन पायलट के प्रचार के साथ कांग्रेस प्रत्याशी को मिली थी. इस बार गुर्जर मतदाताओं में सचिन पायलट को लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रति गुस्सा है. गुर्जर मतदाताओं का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने गुर्जर नेता सचिन पायलट के साथ धोखा किया है. अब कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाना है. अब देखने वाली बात है कि सचिन पायलट गुर्जर समाज को समझा-बुझाकर वोट को कांग्रेस के पाले में डलवाने के लिए कितना कामयाब हो पाते हैं.

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