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राम मंदिर की पहली आरती के लिए जोधपुर से भेजा जाएगा 600 किलो घी, 108 रथों से पहुंचेगा अयोध्या

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भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माणाधीन है. अगले साल जनवरी 2024 में यह मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. राम मंदिर के लोकार्पण को लेकर तैयारियां भी जोरशोर से चल रही हैं. राम मंदिर निर्माण को लेकर जोधपुर शहर ने समर्पण राशि देने में भी देशभर में अग्रणी रहकर रिकॉर्ड बनाया था. वहीं, इस मंदिर में होने वाली पहली आरती और महायज्ञ के लिए गाय का शुद्ध देसी घी जोधपुर से जाने वाला है. देसी गाय के घी से मंदिर में प्रथम अखंड दीपक प्रज्वलित किया जाएगा. इसके अलावा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान होने वाले महायज्ञ में भी यही घी और जोधपुर से जाने वाली हवन सामग्री से आहुतियां दी जाएंगी. जोधपुर के युवा संत ओम संदीपनी महाराज ने इस पुण्य काम का बीड़ा उठाया है. घी को अयोध्या पहुंचाने की तैयारियां भी जोरो-शोर से की जा रही हैं. इसे पौराणिक तरीके से 108 रथों में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा. इन रथों में 216 बैल जोते जाएंगे. जिनमे घी के साथ हवन में आहुति देने के लिए संविदा व हवन सामग्री भी इन रथों के जरिए अयोध्या जाएगी. बताया जा रहा है कि कुल 6 क्विंटल घी और हवन सामग्री लेकर महाराज अयोध्या पहुंचेंगे.

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महाराज ने लिया अनूठा संकल्प

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महाराज व गौशाला संचालक ओम संदीपनी महाराज ने बताया कि साल 2014 में उनके मन मे यह विचार आया कि कभी न कभी सुप्रीम कोर्ट रामभक्तों के पक्ष में फैसला आएगा. बस उसी दिन से उन्होंने यह संकल्प ले लिया कि प्रथम महाआरती व महायज्ञ के लिए वह घी एकत्रित करेंगे. उसी दिन से वे इस कार्य मे जुट गए.

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ऐसे संरक्षित किया घी को

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बीमार व दुर्घटना में घायल गायों की सेवा के उद्देश्य से शुरू की गई गौशाला की शुरुआत 2014 में 60 गायों से की. शुरुआती दौर में इन 60 गायों में से मात्र 5 से पांच गायें दूध दिया करती थी, लेकिन समय के साथ गायें बढ़ती गईं और अब इस गौशाला में करीब 360 गायें हैं. गौसेवक महाराज की माने तो घी में मिलावट हो तो वह जल्द खराब हो जाता है, लेकिन यदि गायों को शुद्ध सेवण घास व हरि घास का सेवन जड़ी बूटियों के साथ खिलाया जाए तो घी लम्बे समय तक खराब नहीं होता है. इसके अलावा गायों के सामने प्रतिदिन हवन किया जाता है. दिनभर गौशाला में ऑडियो माध्यम से श्रीमद्भगवत गीता गायों को सुनाई जाती है, ताकि उत्पादन होने वाले मखन व घी पर उचित सकारात्मक प्रभाव पड़े.

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गायों को सुनाई गई रोजाना श्रीमद भगवद गीता

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महाराज का कहना कि उन्होंने जो देशी घी तैयार किया है. उसे भारत के ऋषि मुनियों की प्राचीन परंपरा के साथ किया गया है. जिसकी वजह से ये जल्दी खराब नहीं होता है. इसके लिए गायों को डाइट में भी बदलाव किया गया है. पिछले 9 साल से गायों को हरा चारा, सुखा चारा, पानी ही दिया जाता था. फालतू कुछ नहीं दिया जाता था. उन्हे बाहर का कुछ भी नहीं खिलाया जाता था. गायों को रोजाना श्रीमद भगवद गीता सुनाई जाती थी. इसके लिए गौशाला में 24 घंटे भगवद गीता चलती रहती थी. जो आज भी जारी है.

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60 गायों से शुरू की थी गौशाला

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महाराज का मानना है की भागवत गीता सुनने से जो भगवान को कृपा गौ माता के ऊपर बरसती है. उनका मन पवित्र हो जाता है. वो भगवान का चिंतन करते हुए चारा खाए और दूध दें. जिससे अमृत तुल्य घी तैयार हो जाता है. 2014 में 60 गायों के साथ गौशाला की शुरुआत की. उस समय अधिकतर वह गाय थीं, जो सड़क हादसे का शिकार हो चुकी थीं. जो दूध नहीं देती थी. उन गायों की यहां पर सेवा की जाती थी. उनमें से तीन चार गाय दूध देती थी. उन्हीं के दूध से दही और मक्खन से घी तैयार किया जाता था.

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अब गौशाला में हैं 350 गायें

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धीमे-धीमे गौशाला में गायों की संख्या बढ़ने लगी वर्तमान में लगभग 350 गायें यहां पर हैं. जिनकी यहां पर परिवार की भांति सेवा की जाती है. इन गायों का घी गौशाला में पूजा पाठ के अलावा भगवान श्री राम मंदिर में होने वाले महायज्ञ और अखंड दीपक के लिए ही संग्रह किया जाता है. गौशाला में गायों को नित्य श्रीमद् भागवत गीता सुनाई जाती है, जिससे कि उसका प्रभाव गाय के दूध दही मक्खन और घी पर भी पड़े. इसके अतिरिक्त हरिद्वार से विशेष जड़ी बूटियां लाई गई गईं, जिसे मिलाकर इस घी को प्रतिवर्ष पुनः गर्म किया जाता है. इसके कारण यह घी खराब नहीं होता है.

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घृत यात्रा में खर्च होंगे 10 करोड़ रुपए होंगे

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इस घी को अयोध्या ले जाने के लिए 108 रथों में 216 बैल जोते जाएंगे. इसके लिए बैलगाड़ियों में रथ तैयार किया जा रहे हैं. सारी तैयारियां जोरों पर है. बताया जा रहा है कि 27 नवंबर से यह घृत यात्रा शुरू होगी. जो करीब 10 हजारों गांवों से होकर निकलेगी. प्रत्येक गांव में यात्रा जाने से पहले सूचित कर दिया जाएगा. प्रयास रहेगा कि प्रत्येक घर से एक मुट्ठी हवन सामग्री एकत्रित की जाएगी. इस घृत यात्रा में 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

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