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गहलोत के गढ़ में पीएम मोदी की हुंकार, मारवाड़ को विकास की सौगात से साधने का प्लान?

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राजस्थान की सियासत में साढ़े तीन दशक से चली आ रही सत्ता परिवर्तन के ट्रेंड को बदलकर अशोक गहलोत चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की कोशिशों में जुटे हैं तो बीजेपी भी अपनी वापसी के लिए कोई कोई कसर नहीं छोड़ रही है. अमित शाह से लेकर पीएम मोदी तक तबड़तोड़ दौरे लग रहे हैं. इस कड़ी में पीएम मोदी गुरुवार को सीएम अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर में विकास की सौगात देकर चुनावी हुंकार भरेंगे. इस तरह जोधपुर से मारवाड़ इलाके के समीकरण को साधने की रणनीति मानी जा रही है. ऐसे में देखना है कि इस बार मारवाड़ में किसका सियासी जादू चलता है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के जोधपुर में पांच हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात से नवाजेंगे. इस दौरान पीएम जोधपुर के सिविल एयरपोर्ट के टर्मिनल का शिलान्यास, जोधपुर आईआईटी जो 15 साल से चल रही है, उसके नए परिसर के निर्माण कार्य, एम्स जोधपुर में बनने वाले ट्रामा सेंटर और क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल की आधारशिला रखेंगे. राजस्थान की पहली नैरोगेज हेरिटेज ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर पीएम मोदी रवाना करेंगे. जैसलमेर को दिल्ली से जोड़ने वाली एक नई ट्रेन रुणिचा एक्सप्रेस और मारवाड़ जंक्शन को खांबली घाट से जोड़ने वाली एक नई हेरिटेज ट्रेन शामिल हैं.

43 विधानसभा सीटों को साधने की रणनीति

पीएम मोदी जोधपुर के रावण का चबूतरा मैदान में बीजेपी की एक जनसभा को संबोधित करके सियासी माहौल बनाने का काम करेंगे. इस तरह मारवाड़ और नागौर जिला के की तकरीबन 43 विधानसभा सीटों को साधने की रणनीति है. इस तरह से सीएम गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर से पीएम मोदी हुंकार भरकर सियासी समीकरण साधते हुए नजर आएंगे. पिछले चुनावों में भी मारवाड़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हुई थी. गहलोत के गढ़ में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बीजेपी के दिग्गज नेता बनकर उभरे हैं और लगातार सक्रिय हैं.

मारवाड़ इलाके का समीकरण

राजस्थान का मारवाड़ इलाके में कुल छह जिले आते हैं, जिसमें जोधपुर, नागौर, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर शामिल हैं. मारवाड़ के जोधपुर संभाग में विधानसभा की कुल 33 सीटें हैं जो हार जीत में अहम भूमिका निभाती है. विधानसभा चुनाव 2018 में जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर जिले में कांग्रेस ने बढ़त ली थी जबकि पाली, सिरोही और जालौर में कांग्रेस को शिखस्त मिली. इन तीन जिलों की 14 सीटों में से कांग्रेस को केवल एक सांचौर सीट पर जीत मिली.

कांग्रेस भले ही सत्ता में वापसी कर गई थी, लेकिन सिरोही और पाली में उसका खाता तक न खुल सका था. हुनमान बेनीवाल की पार्टी आरएलएसपी को ​जोधपुर की भोपालगढ़ सीट पर जीत मिली. इस तरह कुल मिलाकर मारवाड़-गोड़वाल की 33 सीटों में से 16 पर कांग्रेस और 14 पर बीजेपी को जीत मिली थी. एक आरएलएसपी और दो सीटें निर्दलीय की झोली में गई थी. इससे पहले 2003 के विधानसभा चुनावों में मारवाड़ की 32 में से 23 सीट बीजेपी जबकि 8 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी. एक सीट निर्दलीय के कब्जे में थी.

2008 के विधानसभा चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं?

2008 के विधानसभा चुनाव में 33 में से कांग्रेस को 16 जबकि बीजेपी को 15 सीटें मिली. दो पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया. इसके बाद 2013 में 33 में से 30 बीजेपी को और केवल तीन सीटें कांग्रेस को मिली थी. इस बार कांग्रेस और बीजेपी ने जिस तरह से पूरी ताकत झोंक रखी है, इससे यह बात तो साफ जाहिर है कि मारवाड़-गोड़वाल की 33 सीटों पर मुकाबला रोचक होने वाला है.

अशोक गहलोत भी कर रहे अपने गृहक्षेत्र पर फोकस

सीएम अशोक गहलोत अपने गृहक्षेत्र को मजबूत रखने के लिए मैदान में उतर गए हैं तो पीएम मोदी तबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं. पिछले एक सालों में पीएम मोदी एक दर्जन दौरा राजस्थान का कर चुके हैं. इस कड़ी में गहलोत के दुर्ग को भेदने के लिए उतर रहे हैं जबकि अशोक गहलोत इस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और चौथी बार फिर से सीएम बनने के प्रयास में हैं. चुनावी साल के आखिर में सीएम गहलोत ने प्रदेश की जनता को रियायतें देकर उन्हें साधे रखने की स्ट्रैटेजी बनाई है. देखना है कि इस शह-मात के खेल में कौन भारी पड़ता है?

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