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बहरोड़ सीट पर इस बार किसका पलड़ा भारी, 2018 में हारी थी कांग्रेस और BJP

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राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी अभियान जोर पकड़ता जा रहा है. यहां के अलवर जिले में भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. 25 नवंबर को पूरे प्रदेश में एक साथ वोटिंग कराई जाएगी. अलवर जिले के तहत 11 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें 7 सीटों पर कांग्रेस की पकड़ बरकरार है तो 2 सीटों पर बीजेपी के खाते में जीत गई थी, वहीं 2 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली. बसपा के टिकट पर चुने गए 2 विधायक बाद में कांग्रेस में चले गए थे. बहरोड़ सीट पर कांग्रेस और बीजेपी ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया है. पिछली बार यहां से निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली थी.

कैसा रहा राजनीतिक इतिहास

राजस्थान हरियाणा के बॉर्डर पर बसे बहरोड़ सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखा गया था. निर्दलीय प्रत्याशी बलजीत यादव को 55,160 वोट मिले तो कांग्रेस के रामचंद्र यादव के खाते में 51,324 वोट आए. जबकि बीजेपी यहां पर तीसरे स्थान पर खिसक गई और यहां 37,755 वोट मिले. कड़े मुकाबले में 3,836 (2.4%) मतों के अंतर से बलजीत यादव को जीत मिली. तब के चुनाव में बहरोड़ विधानसभा सीट पर कुल 2,09,123 वोटर्स ने वोट डाले, जिसमें पुरुष वोटर्स की संख्या 1,09,209 थी जबकि महिला वोटर्स की संख्या 99,914 थी. इसमें कुल 1,59,691 (77.0%) वोटर्स ने वोट डाले. चुनाव में NOTA के पक्ष में 1,246 (0.6%) वोट पड़े.

कितने वोटर, कितनी आबादी

राजस्थान का सिंहद्वार कहे जाने वाले बहरोड़ विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो एक समय इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हुआ करता था, लेकिन 2018 के चुनाव में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी. 1990 में जनता दल के महीपाल यादव को जीत मिली. 1993 में निर्दलीय प्रत्याशी सुजन सिंह को जीत मिली थी. 1998 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां पर वापसी की और करण सिंह यादव चुनाव जीतकर विधायक बने. 2003 में भी करण सिंह यादव चुने गए. 2004 के उपचुनाव में बीजेपी को यहां से पहली बार जीत मिली. फिर 2008 और 2013 के चुनाव में जसवंत सिंह यादव ने बीजेपी को यहां से लगातार 2 जीत दिलवाकर पार्टी की जीत की हैट्रिक लगवाई. 2018 में निर्दलीय प्रत्याशी बलजीत यादव यहां से चुनाव जीत गए. बहरोड क्षेत्र की कुलदेवी जिलानी माता है. इस सीट के जातीय समीकरण को देखें तो यह क्षेत्र यादव बाहुल्य रहा है. यहां पर करीब 70 हजार यादव वोटर्स हैं. यादवों के अलावा यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटर्स चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. एससी-एसटी वोटर्स के करीब 50 हजार वोटर्स यहां पर रहते हैं. साथ ही ब्राह्मण, सैनी, गुर्जर और राजपूत भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं.

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