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MP-छत्तीसगढ़ में सन्नाटा-राजस्थान में घाटा…चुनाव नतीजों से क्यों शंकित-अचंभित हैं मायावती?

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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना के चुनावी नतीजों से ‘शंकित, अचंभित और चिंतित’ हैं. राजस्थान के अलावा राज्य चुनावों में बीएसपी इस बार खाता भी नहीं खोल सकी. आज उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए. ईवीएम को तो उन्होंने जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन पार्टी चीफ का कहना है कि ‘परिणाम बिल्कुल अलग होकर पूरी तरह से एकतरफा हो जाना, रहस्यात्मक है.’ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में मायावती ने ना सिर्फ उम्मीदवार उतारे बल्कि कई सीटों पर एक्टिव रूप से रैलियां भी कीं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी का खाता नहीं खुला, लेकिन राजस्थान में दो सीटें जीतीं, जो कि पिछले प्रदर्शन के मुकाबले बेहद खराब रहा. पार्टी चीफ का मानना है कि पूरे चुनाव के दौरान माहौल एकदम अलग और कांटे की टक्कर थी, लेकिन चुनाव परिणाम इसका ठीक उलटा आया.

चार राज्यों में बीएसपी वोट शेयर

बसपा को इस बार छत्तीसगढ़ में 2.09 फीसदी, राजस्थान में 1.82 फीसदी, मध्य प्रदेश में 3.4 फीसदी और तेलंगाना में 1.38 फीसदी वोट मिले हैं. पार्टी का परिणाम 2018 चुनाव की तुलना में बेहद खराब रहा. मायावती ने चुनावी परिणामों के एक दिन बाद आज अपने एक्स पोस्ट में कहा कि लोगों की नब्ज पहचानने में उन्हें भयंकर ‘भूल-चूक’ हुई है और इसपर चर्चा करने की जरूरतों पर जोर दिया.

मध्य प्रदेश में बीएसपी का प्रदर्शन

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश का पड़ोसी राज्य है और सीमाई इलाकों में विधानसभा सीटों पर बीएसपी की अच्छी पकड़ मानी जाती है. पार्टी ने यहां 62 उम्मीदवार उतारे. चीफ मायावती ने यहां 8 रैलियां कीं और उन्हें जीत की पूरी उम्मीद थी लेकिन एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. राज्य के चुनाव में बीएसपी को 3.4 फीसदी वोट मिले हैं. पार्टी यहां नागोड़, सिरमौर और सुमावली जैसी सीटों पर दूसरे नंबर पर रही.

राजस्थान में बीएसपी का प्रदर्शन

राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने बड़ा दांव खेला. पार्टी ने यहां सभी 199 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन सिर्फ सादुलपुर और बारी – दो ही सीटें ऐसी हैं, जहां जीत मिली. बीते चुनाव की बात करें तो बीएसपी ने यहां 4.03 फीसदी वोटों के साथ छह सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, सभी बसपा विधायक बाद में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. बीएसपी इसे एक बड़ा सेटबैक मान रही है. चीफ ने यहां आठ सीटों पर रैलियां कीं लेकिन जीत सिर्फ दो ही सीटों पर मिली. इनमें मनोज कुमार सिंह 2574 और जसवंत सिंह गुर्जर 27,424 वोट मार्जिन से जीते.

तेलंगाना-छत्तीसगढ़ में बीएसपी का प्रदर्शन

बहुजन समाज पार्टी ने तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में भी अपने उम्मीदवार उतारे लेकिन इन राज्यों में खाता भी नहीं खुला. पार्टी ने छत्तीसगढ़ में 2.09 फीसदी तो तेलंगाना में 1.38 फीसदी वोट हासिल की. हालांकि, एक भी सीटों पर जीत नहीं मिली. इतना ही नहीं पिछले चुनाव के मुकाबले पार्टी के वोटर्स भी छिटक गए. मसलन, 2018 के छत्तीसगढ़ चुनाव में पार्टी ने 3.87 फीसदी वोट हासिल किया था. तेलंगाना के पिछले चुनाव में पार्टी ने 106 उम्मीदवार उतारे लेकिन हार मिली, वहीं 2014 में पार्टी ने बीआरएस के क्लीन स्वीप के बीच भी दो सीटें जीती थी.

मायावती की क्या थी प्लानिंग?

बसपा सुप्रीमो मायावती एक ऐसी नेता मानी जाती हैं, जिनका मौका देखकर चौका लगाने का इतिहास है. मायावती सार्वजनिक मंचों पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों का विरोध करती नजर आती हैं. यही वजह है कि पार्टी इस बार के चुनाव में अकेले ही मैदान में जाने का फैसला किया. पार्टी को एक निर्णायक वोट मिलने की उम्मीद थी, और चुनाव के बाद गठबंधन करने की चाहत, लेकिन सब पर पानी फिर गया. अब मायावती ने 10 दिसंबर को चार राज्यों में मिली करारी हार की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर की मीटिंग बुलाई है.

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