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‘किसी पार्टी ने नहीं दिया पिछड़ों को हक’- लखनऊ में विपक्ष पर गरजे शाह

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अपना दल पार्टी के संस्थापक सोनेलाल पटेल की जयंती कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बतौर चीफ गेस्ट शिरकत की. शाह को पार्टी की प्रेसिडेंट अनुप्रिया पटेल ने इस कार्यक्रम में इनवाइट किया था. अनुप्रिया एनडीए का हिस्सा हैं और फिलहाल केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. बता दें कि अपना दल (एस) पार्टी का उत्तर प्रदेश में कुर्मी वोट्स पर बहुत प्रभाव है. 2014 से ही कुर्मी वोट बैंक बीजेपी के समर्थक रहें हैं. यही वजह है कि बीजेपी ने भी कुर्मी वोटर्स के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है. अमित शाह ने इस कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए सोनेलाल पेटल को विनम्र श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि सोनेलाल ने अपने पूरे जीवन में दलित, पिछड़े, आदिवासी और वंचित समाज के कल्याण के लिए ही काम किया. उन्होंने इस दौरान क्षेत्रीय विपक्षी दल सपा-बसपा पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को इन विघटनकारी शक्तियों से पूरी तरह से निजात मिला है.

किसी पार्टी ने पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया

शाह ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस, सपा, बसपा कई बार सत्ता में रहे हैं, लेकिन इन्होंने कभी भी पिछड़ा वर्ग को संवैधानिक मान्यता नहीं दी. इन्होंने दलित और आदिवासी की तरह पिछड़ा आयोग नहीं बनाया. उन्होंने कहा कहा पीएम मोदी ने पिछड़ा समाज के लिए आयोग बनाया और सभी के लिए संवेधानिक अधिकार भी दिलाया है. उन्होंने कहा कि अब जाकर प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक हो रही है, वहीं यूपी में सीएम योगी के नेतृत्व में इंडस्ट्रियल इनवेस्टमेंट भी आ रहा है. वहीं गरीब कल्याणकारी योजनाएं भी जरूरतमंदों तक पहुंच रही हैं. शाह ने आह्वान किया कि 2024 में भी अपना दल, निषाद और बीजेपी तीनों मिलकर 2024 में भी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में एनडीए को ही लाना है. उन्होंने बताया कि अपना दल और बीजेपी ने चार चुनाव जिनमें दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव लड़े और जीते हैं.

कुर्मी वोट्स की साधने की कोशिश

यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शाह की इस कार्यक्रम में मौजूदगी बीजेपी की ओर से एक बड़ा संदेश है. दरअसल बीजेपी कुर्मी वोट बैंक को यह संदेश देना चाहती है कि बीजेपी ही उनकी असली हितैषी पार्टी है और एनडीए में अपना दल (एस) की जगह बनी रहेगी और मजबूत से दोनों दल आगे बढ़ेंगे. हालांकि विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटे बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी कद्दावर कुर्मी नेता हैं. अगर नीतीश कुमार विपक्षी दलों को गठबंधन बना लेते हैं तो वह जाहिर तौर पर कुर्मी वोट बैंक में भी मजबूत पकड़ बना सकते हैं. नीतीश के बारे में ऐसी भी खबरें सामने आ रही हैं कि वह यूपी से कुछ सीटों से लोकसभा सीटों पर भी अपना कैंडीडेट उतार सकते हैं.

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