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नहीं मानी गई मुस्लिम पक्ष की दलील, कोर्ट का आदेश- ज्ञानवापी परिसर का ASI सर्वे होगा

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ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर मामले में वाराणसी जिला कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनया है. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की दलील को खारिज करते हुए परिसर का एएसआई सर्वे कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एएसआई सर्वे के दौरान परिसर में नमाज होती रहेगी. सर्वे के इस काम को 3-6 महीने के भीतर पूरा करने का अनुमान है. हालांकि, कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि वो अदालत के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देगा.मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील विष्णु शंकर ने कहा है कि कोर्ट ने वजू टैंक को छोड़कर, जिसे सील कर दिया गया है, ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का एएसआई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है. मुझे लगता है कि सर्वे में 3 से 6 महीने का समय लगेगा. वहीं, हिंदू पक्ष के ही एक अन्य वकील सुभाष नंदन ने चतुर्वेदी ने कहा, ASI सर्वे के आवेदन को कोर्ट ने स्वीकर कर लिया है. यह केस में बड़ा टर्निंग प्वाइंट है.

मामली की पिछली तारीखों की कार्रवाई पर गौर करें तो 12 और 14 जुलाई 2023 को हुई बहस में मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यदि ज्ञानवापी परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण होता है, तो ऐसी स्थिति में उत्खनन आदि से ज्ञानवापी के ढांचे को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे में किसी भी प्रकार से ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर का पुरातात्विक सर्वे नहीं होना चाहिए और इस मामले में हिन्दू पक्ष के द्वारा साक्ष्य संकलन किया जा रहा है, जो कि विधि सम्मत नहीं है.

कोर्ट के सामने हिंदू पक्ष ने दी थी यह दलील

इसी विषय पर गत सुनवाई पर हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं के द्वारा विस्तारपूर्वक जिला न्यायालय के समक्ष हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और कई केस लॉ को रखते हुए जनपद न्यायाधीश से निवेदन किया गया था कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराना अपरिहार्य है, इससे हिन्दूओं में तनावपूर्ण माहौल व्याप्त है. ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर उपजे हुए तनाव का सौहार्दपूर्ण समाधान हो जाए और ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक तथ्य सबके सामने आ सके.ज्ञानवापी परिसर में किस काल खंड में कौन सी संरचना से मंदिर बना था, इस विषय पर आर्कोलॉजी के विशेषज्ञ- राडार पेनिट्रेटिंग, एक्सरे पद्धति, राडार मैपिंग, स्टाइलिस्ट डेटिंग आदि पद्धति का प्रयोग कर सकते हैं. स्टाइलिस्ट डेटिंग में किसी संरचना के निर्माण शैली से उसके सदियों पुराने स्थिति का आंकलन कर पुरातत्व के विशेषज्ञ स्पष्ट व प्रमाणित कर देते हैं कि उस संरचना का कौन सा काल खण्ड है.

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