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राजाखेड़ा सीट पर लगातार जीते कांग्रेस प्रत्याशी, BJP ने झोंकी पूरी ताकत

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राजस्थान के धौलपुर जिले की राजाखेड़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी और खासकर विधायक रोहित बोहरा परिवार के तिलिस्म को भेदना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है. रोहित बोहरा अपने विकास कार्यों के बल पर एक बार फिर से मैदान में ताल ठोक रहे हैं. बोहरा अपने और पिता प्रद्युम्न सिंह के पिछले 50 साल के कार्यकाल में राजाखेड़ा विधानसभा में अनगिनत विकास कार्यों और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का दावा करते हैं. वहीं बीजेपी अपनी सरकार में हुए विकास कार्यो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के बल पर विधानसभा को फतह करना चाह रही है. अगर बात की जाए टिकट वितरण की तो अभी दोनों ही पार्टियों की तरफ से अधिकाधिक उम्मीदवारों का एलान नहीं हुआ है. लेकिन कांग्रेस पार्टी से विधायक रोहित बोहरा की एकमात्र दावेदारी से उनको टिकट मिलना तय माना जा रहा है. इसलिए उन्होंने क्षेत्र में जनसम्पर्क भी शुरू कर दिया है.

कैसा रहा राजनीतिक इतिहास?

वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी भाजपा में आधा दर्जन दावेदार टिकट के लिए जोर अजमाइश कर रहे थे. लेकिन अब धीरे-धीरे तीन नाम मुख्य तौर पर टिकट के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. पिछले चुनाव में भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े अशोक शर्मा के निधन के बाद उनकी पत्नी नीरजा शर्मा बीजेपी की टिकट के लिए दावेदारी कर रही है. पिछले चुनाव में बीजेपी की टिकट के प्रमुख दावेदार रहे नागवेन्द्र सिंह भी पूरी ताकत से मैदान में हैं. युवा चेहरे, जातिगत समीकरण और ईमानदार छवि के कारण उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी होमगार्ड पवन जैन टिकट की जुगत में लगे हुए हैं लेकिन कांग्रेस के विधायक की सजातीय होना और जातिगत आंकड़े उनके पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं.

सामाजिक ताना-बाना

राजाखेड़ा विधानसभा में सबसे अधिक वोट राजपूत समाज के लगभग 40 हजार माने जाते हैं. इसके बाद फिर ब्राह्मण और जाटव 25-25 हजार के लगभग आते हैं. कुशवाह, गुर्जर, लोधी, निषाद, त्यागी सहित अन्य जातियों के वोट भी अच्छी संख्या में है. कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा क्षेत्र में कराये गये विकास कार्यों और भाजपा के दावेदार कांग्रेस सरकार और विधायक की नाकामियों को मुद्दा बना कर विधानसभा का रण फतह करने की जुगत में है.

यहां के प्रमुख मुद्दे

विधानसभा चुनाव में चंबल लिफ्ट परियोजना, चंबल बजरी, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार आदि प्रमुख मुद्दे रह सकते हैं. वसुंधरा सरकार में शुरू की गई चंबल लिफ्ट परियोजना के काम में कांग्रेस सरकार में हुई अनावश्यक देरी से किसानों में नाराजगी है. वहीं दूसरी तरफ विधायक रोहित बोहरा ने उटंगन नदी पर एनीकट बनवा कर पानी की समस्या को हल करने का प्रयास किया है. विधानसभा में किस पार्टी की जीत होगी ये तो मतदाता ही तय करेंगे. चुनाव की घोषणा के बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में वृद्धि होगी.

राजाखेड़ा विधानसभा सीट से जीते विधायक

  • 2018 – रोहित वोहरा – कांग्रेस
  • 2013 – प्रद्युम्न सिंह – कांग्रेस
  • 2008 – रवींद्र सिंह बोहरा – भाजपा
  • 2003 प्रद्युम्न सिंह – कांग्रेस
  • 1998 – प्रद्युम्न सिंह – कांग्रेस
  • 1990 – प्रद्युमन सिंह – कांग्रेस
  • 1985 – मोहन प्रकाश – एलकेडी
  • 1980 – प्रद्युमन सिंह आईएनसी (आई)
  • 1977 – प्रद्युमन सिंह – आईएनडी

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