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एयर स्ट्राइक के साथ अब समंदर से भी गाजा पर वार करेगा इजराइल, जंग में उतारा सबसे खतरनाक वॉरशिप

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अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े, महंगे और हाइटेक हथियारों से लैस युद्ध पोत को इजराइल को देने का फैसला किया है, ताकि वह जरूरत पड़ने पर हमास से निपट सके. अमेरिकी प्रशासन ने USS गेराल्ड फोर्ड नामक इस युद्ध पोत को इजरायल पहुंचाने के आदेश दिए हैं. यह इतना ताकतवर है कि एक साथ लगभग पांच हजार जवान, 90 लड़ाकू विमान, हेलिकाप्टर का ऑपरेशन मैनेज कर सकता है.

इस खास तरह के वॉरशिप पर मिसाइल समेत अनेक अत्याधुनिक हथियार लगे हैं, जो दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं. 5 पॉइंट में समझते हैं इसकी खूबियां.

  1. दुनिया का सबसे हाइटेक वॉरशिप: 18 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से बना यह हाइटेक वॉरशिप अमेरिकी नौसेना का सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस युद्ध पोत है. दावा है कि यह हर मामले में दुनिया के किसी भी पोत से आगे है. यह 337 मीटर लंबा, 78 मीटर चौड़ा और 76 मीटर ऊंचा है. यह एक लाख टन तक की क्षमता के साथ समुद्र का सीना चीरते हुए यात्रा कर सकता है.
  2. 90 लड़ाकू विमान छोड़ सकता है: यह 90 लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर कैरी कर सकता है. इस पर साढ़े चार हजार अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता लिए हुए हैं. वजन, आकार में विशालकाय होने के बावजूद यह समुद्र में बेहद फुर्ती से चलता है. इसकी स्पीड 56 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है, जो समुद्री पोत के लिए शानदार स्पीड है.
  3. रडार और सेंसर करते हैं ट्रैकिंग: इसमें लगे सभी अत्याधुनिक हथियार दुश्मन को किसी भी समय धूल में मिलाने की क्षमता रखते हैं. यह हमेशा अपने साथ कई बैक अप प्लान के साथ चलता है. इसकी फ्लीट में क्रूजर हैं तो विध्वंसक जहाज भी हैं. इसके लिए साजो-सामान से लेकर अन्य जरूरी चीजों की सप्लाई करने वाले जहाज भी हैं. इसमें लगे रडार और सेंसर इसे औरों से अलग और ज्यादा सुरक्षित बनाते हैं. यह बिजली उत्पादन खुद करता है. इसमें दो यूनिट लगी हैं, जो जरूरत भर को बिजली उपलब्ध करवाती हैं.
  4. 90 दिन लगातार समुद्र में जंग के लिए तैयार: यह अपने साथ 90 दिन की जरूरत का साजो-सामान लेकर चल सकता है. मतलब यह हुआ कि 90 दिन तक यह बिना किसी बाहरी मदद के समुद्र से दुश्मन को रौंदने की स्थिति में है. यह साल 2017 में अमेरिकी नौसेना का हिस्सा बना. इसके निर्माण को पूरा करने में करीब 10 वर्ष का समय लगा. लागत आई 18 अरब अमेरिकी डॉलर.
  5. ऐसे पड़ा नाम: इसका नामकरण अमेरिकी राष्ट्रपति रहे गेराल्ड आर फोर्ड के नाम पर किया गया है. फोर्ड ने नौसेना को भी अपनी सेवाएं दी थीं, इसीलिए यह अत्याधुनिक पोत उन्हें समर्पित किया गया. तुलनात्मक तरीके से इसकी ताकत को आसानी से समझा जा सकता है. भारत का सबसे बड़ा पोत आईएनएस विक्रांत कुल 45 हजार टन की क्षमता के साथ सेवारत है. यह 262 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा तथा 59 मीटर ऊंचा है. यह 36 विमान का संचालन करता है और इस पर 1650 अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं.

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