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महाशिवरात्रि पर जानिए 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में, ये मंदिर कहां स्थित हैं और क्या महत्व

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फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 8 मार्च, 2024 को मनाया जा रहा है। शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव का गुणगान करते हैं। शिव पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है। इस दिन पूजा के साथ शिव जी के पौराणिक मंदिरों में दर्शन करने की परंपरा है। शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व सबसे ज्यादा है। अगर आपके शहर में या आपके शहर के आसपास कोई ज्योतिर्लिंग है तो वहां दर्शन जरूर करें। जो लोग ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं तो शिव जी की किसी अन्य मंदिर में दर्शन-पूजन कर सकते हैं। अगर मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही शिव पूजा करें और 12 ज्योतिर्लिंगों के स्तोत्र का पाठ करें। इस पाठ से भी ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का पुण्य मिल सकता है।

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ये मंत्र इस प्रकार है:

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सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

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उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥

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परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।

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सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

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वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।

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हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

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एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः

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सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

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द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

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सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।

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उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥1॥

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परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌।

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सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥

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वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।

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हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥

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एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।

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सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥

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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

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सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रभास पाटन, वेरावल में समुद्र तट के किनारे स्थित है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्र देव ने किया था। इसकी महिमा महाभारत, श्रीमद्भागवत, स्कन्द पुराण और ऋग्वेद में वर्णित है। माना जाता है कि सोमेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा से सब पापों से मुक्ति की प्राप्ति हो जाती है। इस स्थान को ‘प्रभास पट्टन’ के नाम से भी जाना जाता है।

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

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द्वादश ज्योतिर्लिंगों में दूसरे स्थान पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आता है। ये मंदिर आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के किनारे श्रीशैल (श्रीपर्वत) पर्वत पर स्थित है। इसे दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं। महाभारत के अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव का पूजन करने से अश्वमेध यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इसमें मल्लिका माता पार्वती का नाम है और अर्जुन भगवान शंकर को कहा जाता है।

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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

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भगवान शिव के इस स्वरूप का वर्णन शिव पुराण में भी विस्तार से मिलता है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित यह मंदिर भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा ज्योतिर्लिंग है। इसकी खास बात यह है कि यह एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जो दक्षिण मुखी है। यही वजह है कि तंत्र साधना के लिहाज से इसे काफी अहम माना जाता है।

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

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मध्यप्रदेश के खंडवा में ओंकारेश्वर मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ओंकारेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथे स्थान पर ओंकारेश्वर चौथा ज्योतिर्लिंग आता है। मान्यता है कि भगवान शिव यहां मां पार्वती के साथ विराजमान हैं और दोनों यहां पर चौसर का खेल भी खेलते हैं। इसके लिए यहां मंदिर में चौसर-पासे, पालना और सेज भी सजाए जाते हैं।

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केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

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भगवान शिव जी का पांचवां ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में है। इसका नाम है केदारनाथ। ये मंदिर उत्तराखंड के चारधामों में भी शामिल है। शिवपुराण की कोटी रुद्र संहिता में लिखा है कि एक समय में बदरी वन में विष्णु भगवान के अवतार नर-नारायण शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का रोज पूजन करते थे। ये वो ही शिवलिंग है। वर्तमान मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं-9वीं सदी में करवाया था।

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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

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भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग छठा ज्योतिर्लिंग माना गया है। मान्यताओं के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के मंदिर का पुनर्निर्माण छत्रपति शिवाजी ने करवाया था। वहीं शिव पुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में सूर्योदय के बाद जो भी सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा अर्चना करता है उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग वर्षा ऋतु में पूरी तरह से जल में डूब जाता है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है।

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काशी विश्वनाथ

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ज्योतिर्लिंग सातवें स्थान पर काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग हैं। यह मंदिर वाराणसी में स्थित है। मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है। कई महान विभूतियां जैसे आदि गुरु शंकराचार्य, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, गोस्वामी तुलसीदास भगवान काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर चुके हैं। बताया जाता है कि वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था।

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त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग

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त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आठवें स्थान पर आता है। भगवान त्रयम्बकेश्वर का मंदिर ब्रह्मागिरी पर्वत पर स्थित है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है। इस प्रसिद्ध मंदिर का पुनर्निर्माण मराठा साम्राज्य के पेशवा नाना साहेब ने वर्ष 1755 से 1786 के मध्य में करवाया था। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित है।

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वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

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मान्यता है कि वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को रावण द्वारा स्थापित किया गया था। इस स्थान पर पूजा-पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसका स्थान द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नौंवे स्थान पर आता है। कई लोग इसे रावणेश्वर धाम के नाम से भी पुकारते हैं। यह महाराष्ट्र के बीड जिले में स्थित है।

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नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

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भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में दसवें स्थान पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारिकापुरी से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शिव पुराण में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को दारूकावन क्षेत्र में ही वर्णित किया गया है। मान्यता है कि इस मंदिर में अलग-अलग धातुओं से बने नाग-नागिन अर्पित करने से नाग दोष से छुटकारा मिल जाता है।

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

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रामेश्वरम मंदिर तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। वहीं मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने समुद्र के तट पर बालू से शिवलिंग का निर्माण किया था। श्री राम द्वारा निर्मित शिवलिंग के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को रामेश्वरम कहा जाता है। यह ज्योतिर्लिंगों में 11वें स्थान पर आता है।

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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

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बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग माना जाता है। घृष्णेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं शताब्दी में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। इसे घुश्मेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र के एलोरा के समीप बेरूल गांव में स्थित है।

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