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राजस्थान के लिए नड्डा का टारगेट 2 करोड़, क्या है इसके पीछे की रणनीति?

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साल के आखिर में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों ने कमर कस ली है. अशोक गहलोत की सरकार की खामियां गिनाने के लिए भगवा पार्टी ने हमले करने शुरू कर दिए हैं. उसने राज्य में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बनाया है. वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुलाबी नगरी जयपुर का रविवार को दौरा किया और ‘नहीं सहेगा राजस्थान’ अभियान का शंखनाद किया. जेपी नड्डा ने अपनी रणनीति को साफ कर दिया है कि उन्हें इस चुनाव में किस तरह से आमजन के बीच में उतरना है. उनका कहना है कि सूबे की गहलोत सरकार में भ्रष्टाचार के अलावा दलितों, महिलाओं, आदिवासियों और बच्चों पर अत्याचार के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. यही वजह है कि बीजेपी ‘नहीं सहेगा राजस्थान’ अभियान की शुरुआत कर रही है. नड्डा का कहना है कि उनकी पार्टी इस अभियान के जरिए राजस्थान के दो करोड़ लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी. इसके लिए पार्टी हर पंचायत, गांव और ढाणी में जाएगी. पार्टी का सीधा मैसेज पहुंचाया जाएगा ताकि राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त कराया जा सके.

बीजेपी और कांग्रेस की कांटे की टक्कर

अब समझने वाली बात ये है कि बीजेपी अध्यक्ष ने दो करोड़ लोगों तक पहुंचने का टारगेट सेट क्यों किया है? इसकी सीधी रणनीति पिछले विधानसभा चुनाव में मिले वोटों के समीकरण से मेल खाती है. राजस्थान में विधानसभा सीटों की संख्या 200 है, जहां साल 2018 के विधानसभा चुनाव में 4 करोड़, 77 लाख, 89 हजार, 966 मतदाता थे, जिनमें से 3 करोड़, 57 लाख, 6 हजार, 726 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. अब बात आती है कि बीजेपी और कांग्रेस को कितने वोट मिले थे. गौर करने वाली बात है कि वोटों का अंतर ज्यादा नहीं था.

पिछले चुनाव में बीजेपी को मिले थे 38.08 फीसदी वोट

पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 1 करोड़, 39 लाख, 35 हजार, 201 वोट मिले थे, जबिक बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के खाते में 1 करोड़ 37 लाख, 57 हजार, 502 वोट गए थे. कुल मिलाकर बीजेपी 1 लाख, 77 हजार, 699 वोटों से हारी थी. फीसद की बात करें तो कांग्रेस को 39.30 फीसदी और बीजेपी को 38.08 फीसदी वोट मिले थे. चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. यही कारण है कि जेपी नड्डा ने 2 करोड़ वोटरों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. हालांकि पिछले चुनाव के मुकावले इस चुनाव में वोटर्स की संख्या में इजाफा हुआ है.

राजस्थान में 4 चुनाव से रिपीट नहीं हुई किसी पार्टी की सरकार

राजस्थान में बीजेपी आक्रामक मोड में दिखाई दे रही है. सूबे के नेता मानकर चल रहे हैं कि इस बार भी पुराना ट्रेंड फिर से सफल होगा क्योंकि पिछले 4 चुनावों से किसी भी पार्टी की कोई भी सरकार रिपीट नहीं हुई है. एक बार कांग्रेस तो दूसरी बार बीजेपी सरकार बनाने में सफल रही. हालांकि इस बार सीएम अशोक गहलोत को कई मौके पर ये कहते हुए सुना गया है कि उनकी सरकार रिपीट होगी, लेकिन देखा जाए तो सत्ताधारी पार्टी के जिन विधायकों को दोबारा टिकट दिया गया उनमें कई को हार का सामना करना पड़ा. जनता ने सबसे ज्यादा मंत्रियों को हराया है. उन्हें अगले चुनाव में नाम मात्र के वोट मिले हैं. बीजेपी ने पिछले चुनाव में 163 में से 94 विधायकों को दोबारा टिकट दिया था, जिसमें से 54 को हार का मुंह देखना पड़ा था, जबकि 40 ही चुनाव जीत सके थे.

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