Report Times
latestOtherकरियरकृषिझुंझुनूंटॉप न्यूज़ताजा खबरेंराजस्थानस्पेशल

रिटायरमेंट के बाद खेती को बनाया जॉब, जैतून उपजाकर अब हो रहा मालामाल

REPORT TIMES

जैतून की खेती किसानों की किस्मत बदल रही है. राजस्थान के झुंझुनूं में इन दिनों इसका नजीर देखा जा रहा है. किसान जैतून की खेती से मालामाल हो रहे हैं. झुंझुनूं के कई गांवों में आज इजराइल वाले जैतून की फसलें लहलहा रही हैं. जिले में धीरे-धीरे इसका रकबा भी बढ़ता जा रहा है. उदाहरण के लिए झुंझुनूं से 40 किलोमीटर दूर झरेली गांव के मुकेश मांझु के खेतों को देखा जा सकता है. वैसे तो मुकेश ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए और बीएडी की पढ़ाई की है और एनएसजी से रिटायर्ड हैं. लेकिन आज खेती में पूरा समय लगा रहे हैं. वो कहते हैं उनका परिवार शुरुआत से ही खेती से जुड़ा हुआ था.उनके खेतों में 450 से ज्यादा जैतून के पेड़ लहलहा रहे हैं. किसान मुकेश इस खेती से लाखों कमा रहे हैं.

2014 से शुरू की थी जैतून की खेती

मुकेश ने जैतून की खेती की शुरुआत अगस्त 2014 में की थी. शुरुआत में कुछ ही पौधे लगाए. इसके बाद धीरे.धीरे पौधों की संख्या बढ़ती चली गई. आज की तारीख में पौधों की संख्या करीब 500 तक पहुंच गई. मुकेश का कहना है कि जैतून की खेती करने में सरकार के कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों का भी खूब सहयोग रहा.

पिता के सुझाव पर की जैतून की खेती

मुकेश कहते हैं जब वो सर्विस से रिटायर्ड हो गए तो उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. ऐसे में उनके पिताजी ने सुझाव दिया कि जैतून की खेती की जा सकती है. इसके बाद उन्होंने बीकानेर जाकर जैतून का पौधा खरीदा. फिर खेतों में उसे रोपना शुरू किया. मुकेश के मुताबिक महज चार साल के बाद ही वे पौधे पेड़ बन गए और आय भी शुरू हो गई. पहली बार 60 हजार रुपए कमाए. उसके बाद धीरे-धीरे आय बढ़ी.आज की तारीख मे डेढ़ लाख रुपए सालान कमाई हो रही है.

पीढ़ी दर पीढ़ी कमाई का जरिया

मुकेश का कहना है कि दो साल बाद जैतून के पौधे बढ़ने से इसकी पत्तियों को काटकर बेचा जा सकता है. इसकी पत्तियां भी 50 से 60 रुपए प्रति किलो बिक रही है. उगाने के 4 या 5 साल के बाद इसमें फल लगने शुरू हो जाते हैं, इसे भी कई कंपनियां खरीद लेती हैं. कहते हैं इस पेड़ की उम्र एक हजार साल तक की होती है. ऐसे में सोचा जा सकता है. इसकी खेती पीढ़ी दर पीढ़ी कितनी लाभदायक है.

बड़े काम का है जैतून का तेल

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक शीशराम जाखड़ का कहना है इस पौधे में माइनस डिग्री से लेकर 48 डिग्री तक तापमान सहने की क्षमता होती है. इसके पौधे इज़राइल, अमरीका, चीन, न्यूजीलैंड सहित अनेक देशों में बड़ी संख्या में उगाए जा रहे हैं. इसे अंग्रेजी में ओलिव भी बोलते हैं. जैतून का तेल (ओलिव ऑइल) खाना पकाने, सौंदर्य प्रसाधन, दवा, साबुन बनाने और पारम्परिक दीप प्रज्जवल में भी काम आते हैं.

Related posts

Rajasthan Police: मुख्यमंत्री भजनलाल की पुलिसकर्मियों को ट्रिपल खुशखबरी, राजस्थान पुलिस कल्याण फंड सहित विभिन्न फंड के लिए की घोषणाएं

Report Times

क्या है एंटी-पेपर लीक कानून? जुर्माना भरने में ब‍िक जाएगा घर-जायदाद! जेल में कटेंगे 10 साल

Report Times

सोमवार के दिन मेष समेत इन 3 राशि वालों को करियर-कारोबार में मिलेगी तरक्की

Report Times

Leave a Comment