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तेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच मुकाबले को बीजेपी ने बनाया त्रिकोणीय, किंग से पहले किंगमेकर बनने का प्लान

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तेलंगाना विधानसभा चुनाव का प्रचार अभियान मंगलवार शाम थम जाएगा और 30 नवंबर को 119 सीटों पर मतदान होगा. केसीआर सत्ता की हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रहे हैं तो कांग्रेस 15 साल बाद सरकार में आने के लिए मशक्कत रही है. कांग्रेस और बीआरएस के बीच होते मुकाबले को बीजेपी ने त्रिकोणीय बना दिया है. सीएम योगी से लेकर अमित शाह और पीएम मोदी तक ने तेलंगाना चुनाव प्रचार में ताकत झोंक रखी है, जिसके चलते बीजेपी ने कई सीटों पर लड़ाई रोचक बना दी है. बीजेपी भले किंग न बन सके, लेकिन किंगमेकर वाली स्थिति में आ सकती है?बीजेपी तेलंगाना में पवन कल्याण की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. बीजेपी ने प्रदेश की कुल 119 सीटों में से 111 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं तो 8 सीटों पर पवन कल्याण की जन सेना पार्टी के प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. 2018 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भले ही एक सीट मिली थी. गोशामहल सीट से टी राजा सिंह जीते थे, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पहली बार संजीवनी मिली. बीजेपी 19.65 फीसदी वोटों के साथ चार लोकसभा सीटों पर कब्जा जमाया था. इसी के बाद बीजेपी की तेलंगाना में उम्मीद जागी और इस बार के चुनाव में नई रणनीति के साथ उतरी है. तेलंगाना में बीजेपी की नजर ओबीसी और दलित वोट बैंक पर है, जिसके साधने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी है. बीजेपी ने राज्य में मुफ्त की योजनाओं के साथ परिवारवाद और मुस्लिम आरक्षण को भी चुनावी मुद्दा बनाया है. बीजेपी ने प्रजा संग्राम यात्रा के जरिए एक हजार किलोमीटर की पदयात्रा करके केसीआर के खिलाफ सियासी माहौल बनाने का दांव चला. बीजेपी ने पदयात्रा के दौरान करप्शन और परिवारवाद के जरिए केसीआर पर सीधा हमला बोला. आक्रामक प्रचार ने तेलंगाना की राजनीति में बीजेपी को मेन रेस में ला दिया है.

हिंदुत्व का एजेंडा सेट कर रही बीजेपी

बीजेपी ने केसीआर विरोध के फार्मूले के साथ हिंदुत्व का एजेंडा सेट कर रही है. बीजेपी इसी सियासी फॉर्मूले के हैदराबाद नगर निगम चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है. 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में केसीआर दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी ने उनके खिलाफ गजवेल विधानसभा सीट से ईटाला राजेंद्र जैसे धाकड़ नेता को उतार दिया. केसीआर को सीधी चुनौती देकर बीजेपी ने कांग्रेस को भी अपने तेवर दिखा दिए हैं. नतीजा यह रहा कि केसीआर के दूसरे चुनाव क्षेत्र कामारेड्डी से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को खुद मैदान में उतरना पड़ा.

तेलंगाना की सियासत में बीजेपी के चार सांसदों में से तीन नॉर्थ तेलंगाना क्षेत्र से आते हैं. करीमनगर से बंडी संजय, निजामाबाद से धर्मपुरी अरविंद और आदिलाबाद से सोयम बापू राव हैं. पार्टी ने इन तीनों सांसदों को नॉर्थ तेलंगाना में विधानसभा चुनाव में उतारा है. संजय को करीमनगर सीट से, धर्मपुरी अरविंद को कोलुतरा से और बापू राव को निजामाबाद से किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा हैदराबाद की गोशामहल में टी राजा सिंह और हुजूराबाद में इटाला राजेंद्र काफी मजबूत स्थिति में हैं.

इन इलाकों में मजबूती के साथ मैदान में उतरी है बीजेपी

बीजेपी ने हैदराबाद के अलावा, निर्मल, आदिलाबाद, करीमनगर, हुजूराबाद और निजामाबाद जैसे इलाकों में मजबूती के साथ चुनावी मैदान में है. माना जा रहा है कि बीजेपी इन इलाके की सीटों पर किंगमेकर की भूमिका दिख रही है. बीजेपी की यह कोशिश है कि तेलंगाना में किसी को भी यहां स्पष्ट बहुमत न मिले और उस स्थिति में सरकार बनाने के लिए उसकी भूमिका अहम हो जाएगी. यही वजह है कि आखिरी में बीजेपी ने अपने तमाम दिग्गज नेताओं को चुनावी प्रचार में उतार दिया है और पीएम मोदी प्रचार के अंतिम दिन तक डेरा जमाए रखेंगे. इस दौरान पीएम तिरुपति बालाजी के दरबार में माथा टेका तो हैदराबाद में रोड शो करके सियासी एजेंडा सेट करने की रणनीति है.

उत्तरी तेलंगाना के कई इलाकों में बीजेपी मजबूत

उत्तरी तेलंगाना इलाके के कई शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और वह बीआरएस व कांग्रेस के उम्मीदवारों की जीत-हार को प्रभावित कर सकती है. माना जा रहा है कि बीजेपी कम से कम 20 क्षेत्रों में कांग्रेस और बीआरएस से सीधे मुकाबले में दिख रही है. इसके चलते ही इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है. बोथ, मुधोले, कोरूतला, निर्मल, निजामाबाद सिटी, परकल, हनमकोंडा, महेश्वरम, राजेंद्रनगर, अंबरपेट, उप्पल, मेडचल, मल्काजगिरी, सीरिलिंगमपल्ली, महबूबनगर, नारायणपेट में बीजेपी मुख्य फाइट में है, किसी सीट पर कांग्रेस से तो किसी सीट पर बीजेपी से मुकाबला है.

बीजेपी ने ऐसे बदला तेलंगाना का माहौल

तेलंगाना में प्रधानमंत्री मोदी की ओर से लगातार की जा रही जनसभा, मडिगा उप-समूह को लाभ पहुंचाने के लिए अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण की घोषणा और एक ओबीसी नेता को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने से भी कई सीटों पर बीजेपी के पक्ष में माहौल बना है. राजनीतिक विश्लेषक की माने तो इस बात की पूरी संभावना है कि बीजेपी तेलंगाना में कांग्रेस के बजाय बीआरएस के वोट बैंक में सेंधमारी करेगा. ऐसे में देखना है कि बीजेपी अपना काम बनाती है या फिर कांग्रेस और बीआरएस का खेल बिगाड़ेगी?

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